कौन है दिलीप प्रजापति क्यों कार्यवाही करने से कतरा रहा जिला प्रशासन ?

सिटी मजिस्ट्रेट से शिकायत करती उषा मौर्या
जौनपुर। उषा मौर्या नामक महिला की जमीन फर्जी खतौनी के सहारे खरीदने वाले दिलीप प्रजापति के खिलाफ क्यो नही कोई कार्यवाही कर रहा है आखिर कौन है किसका बेटा इसके पास इतनी बड़ी रकम आयी कहा से। पहली तहकीकात पता चला दिलीप प्रजापति ग्राम खानपुर थाना सरायखाजा के रहने वाले भूलईराम प्रजापति का पुत्र है।
सूत्रो से मिली जानकारी के अनुसार दिलीप प्रजापति के पिता भूलईराम प्रजापति विवादित जमीनो की खरीद फरोख करने का काम करते है। सबसे खास बात यह सामने आयी की जिसकी सत्ता आती है उसके किसी बड़े नेता खेमे में शामिल होकर विवादित और सार्वजनिक जमीनों को पता लगाकर अपने नाम लिखवाकर उसे बेचने का काम करता है। भूलई ने पचहटिया गांव में फर्जी खतौनी के अधार पर उषा मौर्या की जमीन को 60 लाख रूपये में अपने बेटे दिलीप प्रजापति के नाम रजिस्ट्री करायी उसके खुद भण्डारी रेलवे स्टेशन के पास पुलिस क्लब के एक हिस्से को अपने नाम 40 लाख रूपये में लिखवाकर उस पर कब्जा करने लिए पुलिस क्लब को ध्वस्त करा दिया था। लेकिन जब यह बात एसपी बबलू कुमार के कानो तक पहुंची तो उन्होने उस पर कब्जा करने से रोकने के साथ ही सभी हिस्सेदारो के खिलाफ मुकमा दर्ज करने का आदेश दिया था। लेकिन पुलिस क्लब को खरीदने वाले सत्ता के इतने करीब थे कि उनका तबादला रातो रात करवा दिया। भूलई अपनी पत्नी मिन्ता देवी के नाम सिद्दीकपुर स्थित कताई मिल के पास 120 एयर जमीन 12 लाख में 27 जुलाई 2013 को खरीदा था। इसी तरह भूलई अन्य कई स्थानो पर अपने परिवारो के नाम जमीन लिखवाई है।
अब बात आती है उषा मौर्या का मामला। उषा पिछले दो वर्षो से जालसाजी और फरेब करके दिलीप प्रजापति ने 60 लाख रूपये में लिखवा लिया। उषा के कागजात और कोर्ट का आदेश यह सिध्द कर दिया है कि जमीन की असली हकदार उषा मौर्या और उसकी बहन है। उसके बाद भी जिला प्रशासन दिलीप के खिलाफ क्यो कार्यवाही करने से कतरा रहा है।
इसका जवाब केवल उषा मौर्या ही देती। उनका सीधा आरोप कैबिनेट मंत्री पारसनाथ यादव और उनके बेटे लकी यादव पर ही जाता है उनका कहना है कि भूलईराम प्रजापति और उसका बेटा दिलीप प्रजापति पारसनाथ के लिए काम करते है वे विवादित जमीन का पता लगाकर मंत्री और उनके पुत्र लकी यादव को बताते है उसके बाद फर्जी कागजात तैयार करके पहले अपने या अपने बेटे के नाम रजिस्ट्री कराते है। उसके बाद मंत्रीजी अधिकारियों पर दबाव बनवाकर पीडि़त लोगो को प्रताडि़त कराते है। जिसके कारण गरीब कमजोर  पीडि़त अपनी लाखो करोड़ो की जमीन कौडि़यो के भाव बेचने को मजबूर हो जाता है। 

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