तुगलकी नीति से मजाक बना हुआ है केराकत सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र
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केराकत के चिकित्सा अधीक्षक पर मेहरबान बने हुये हैं सीएमओ साहबएकाध को छोड़कर अपने कर्तव्यों से खिलवाड़ कर रहे हैं सभी स्टाफकर्मी
जौनपुर। जनपद के चर्चित मुख्य चिकित्सा अधिकारी की तुगलकशाही नीति से केराकत सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र में भ्रष्टाचार का वातावरण कायम हो गया है। उनकी तुगलकशाही नीति के तहत मनमाने ढंग से पिछले दिनों किये गये स्थानान्तरण आदेश से जहां भ्रष्टाचार की बू आने लगी है, वहीं स्वास्थ्य विभाग का कार्य भी बुरी तरह से प्रभावित हो रहा है। सीएमओ की पक्षपातपूर्ण भ्रष्ट स्थानान्तरण नीति का ही परिणाम है कि केन्द्र पर तैनात एकाध चिकित्सक को छोड़कर कोई कभी भी समय से नहीं आता है। इतना ही नहीं, स्वयं चिकित्साधीक्षक डा. वीपी द्विवेदी नियमित न आकर सप्ताह में मात्र एक या दो दिन आते हैं और वह भी कुछ समय के लिये। सूत्रों की मानें तो रात्रि विश्राम तो दूर रहा, शेष दिन वह वाराणसी में ही रहकर अपना निजी चिकित्सालय चलाते हैं। क्या सीएमओ साहब यह बता सकते हैं कि सप्ताह में मात्र दो दिन ही चिकित्सा अधीक्षक की ड्यूटी है? जबकि सरकार उन्हें वेतन के रूप मंे प्रतिमाह लगभग 1 लाख रूपये देती है। प्रश्न यहां यह उठता है कि आखिर किस शासनादेश के तहत चिकित्साधीक्षक सप्ताह में मात्र दो दिन के लिये ड्यूटी करते है? वह कौन सी मजबूरी है जिसके चलते सब कुछ जानते हुये भी सीएमओ साहब केराकत के चिकित्साधीक्षक पर शिकंजा कसने की बजाय उन पर मेहरबान बने हुये हैं जबकि आये दिन यह उपदेश देते रहते हैं कि काम न करने वालों का तबादला किया जायेगा जबकि उनकी तबादला नीति ठीक इसके विपरीत है, क्योंकि दायित्वों के प्रति समर्पित लोगों पर तबादला रूपी शिकंजा कसने के साथ वह गैरजिम्मेदार कर्मियों पर मेहरबान हैं। ऐसी स्थिति में उक्त केन्द्र की पूरी चिकित्सा व्यवस्था ध्वस्त होने के साथ मजाक बनकर रह गयी है। आम मरीज आक्रोशित होकर सरकार को कोसते हुये वापस लौट रहे हैं। क्षेत्रीय लोगों के अनुसार सुबह का अस्पताल होने के बावजूद भी 10 से 11 बजे तक चिकित्सकों की कुर्सी खाली पड़ी रहती है जिसके चलते दूर से आने वाले मरीज व परिजन परेशान दिखते हैं। अस्पताल में आपरेशन से लेकर गर्भवती महिलाओं के प्रसव तक धनउगाही के नाम पर खुली लूट का धंधा जगजाहिर है। प्रसव के पश्चात् नजराने के नाम पर खुली लूट का राज तो किसी से भी छिपी नहीं है। क्या सीएमओ साहब को यह नहीं दिखता? अब प्रश्न यह उठता है कि आखिर लूट खसोट और भ्रष्टाचार का यह धंधा कब तक चलता रहेगा? क्षेत्रवासियों के सब्र का बांध किसी भी समय टूट सकता है लेकिन तब तक काफी देर हो चुकी रही होगी। कुल मिलाकर इसके लिये मुख्य रूप से मुख्य चिकित्सा अधिकारी महोदय ही पूरी तरह से जिम्मेदार माने जायेंगे।
