रामकथा से करें सद्गुण का विकासः बृजभूषण दास

जौनपुर। जीवन एकांकी मार्ग पर नहीं चलता और चलना भी नहीं चाहिये, क्योंकि जो जीवन अपने रास्ते पर चलती थी, वह आज क्यों बिगड़ गयी। यह बात सोचनीय है। उक्त बातंे मायाशंकर जनकल्याण समिति मायानगर मदारपुर दोयम में पुरूषोत्तम मास में चल रहे मासिक कथा को सम्बोधित करते हुये काशी के प्रख्यात कथा वाचक स्वामी बृजभूषण दास ने व्यक्त किया। उन्होंने मर्यादा पुरूषोत्तम के प्रारम्भिक शिक्षा का वर्णन करते हुये कहा कि संस्कार हेतु उन्हें चारों वेदों का अध्ययन कराया गया जिसमें 100 कालखण्डों के बारे मंे गुरूओं द्वारा जानकारी दी गयी। उन्होंने कहा कि तब की शिक्षा के सापेक्ष आज की शिक्षा में कितनी गिरावट आयी है। इससे हम अनभिज्ञ नहीं है। श्रीराम के चरित्र का वर्णन करते हुये स्वामी ने कहा कि आज देश में शिक्षा व समाज का सही मार्गदर्शन न मिलने के कारण व्यभिचार, अनाचार व दुराचार में व्यापक वृद्धि हुई है, क्योंकि चरित्रहीन लोगों का समावेश वर्तमान में वृहद रूप से हो गया है। सम्मान के साथ धन पर चर्चा करते हुये कहा कि जब व्यक्ति के पास धन आना शुरू हो जाय तो उन्हें सावधान हो जाना चाहिये, क्योंकि धन तमाम दुर्गुण लेकर आता है। वह आदर्शों, रीति-रिवाजों व परम्पराओं पर प्रहार करता है। कुटम्ब नामक संस्था पूर्व में जो चल रही थी और एकता का मिसाल बन रही थी। आज आवश्यकता है। विशेषकर युवाओं को एकजुट होने व सच्ची राह पर चलने से देश व समाज को सही दिशा मिले। इस अवसर पर आयोजक कृष्ण दत्त दूबे, समर, मंगल, सिटू, लल्ला, दयाराम यादव, रमेश सिंह, डब्लू सिंह, राम नरेश सिंह सहित अन्य उपस्थित रहे।

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