उम्रकैद की सजा काट रहे कैदी जेल में बना रहे हैं कोर्ट के लिए फर्नीचर
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वाराणसी. वाराणसी की सेंट्रल जेल में उम्रकैद की सजा काट रहे
कुछ कैदी जेल की चारदीवारी के अंदर अपनी बची हुई जिंदगी को नए मायने देने
में लगे हुए हैं। इसके लिए उन्होंने एक अनोखा रास्ता निकाला है। जेल के
छोटे-मोटे काम करने के अलावा उन्होंने न्यायालयों के लिए फर्नीचर बनाने का
काम भी शुरू कर दिया है। इसमें टेबल, बेंच और साधारण कुर्सियों के साथ जज
की स्पेशल कुर्सी भी शामिल है। इस योजना को हाईकोर्ट की पहल पर शुरू किया
गया है। इसका मकसद कैदियों के पुनर्वास के साथ ही उनमें कुछ अलग करने की आस
जगाना भी है।
सेंट्रल जेल के अधीक्षक एससी त्रिपाठी ने बताया कि फर्नीचर बना रहे
लोग बाहर से बुलाए गए कारपेंटर नहीं हैं। ये सभी इसी जेल में उम्रकैद की
सजा काट रहे अपराधी हैं। उन्होंने बताया कि कैदियों द्वारा बनाया गया
फर्नीचर बाजार में बेचने के लिए नहीं है। इसका इस्तेमाल राज्य के
न्यायालयों में किया जाएगा। हाईकोर्ट की पहल पर ही एक सोसाइटी बनाकर इन
कैदियों से यह काम करवाया जा रहा है। इन कैदियों को उनका मेहनताना भी दिया
जाता है। इस काम के जरिए वे जेल में सजा काटते हुए भी बाहर अपने परिवार की
आर्थिक मदद कर सकते हैं।
जेल से पाल रहे हैं परिवार का पेट
एससी त्रिपाठी के मुताबिक, ये कैदी सुबह से लेकर शाम तक पूरी मेहनत और
लगन से इन फर्नीचरों को बनाते हैं। इसमें लकड़ी की कटाई, फर्नीचर की पॉलिश,
कुर्सियों की बुनाई का काम शामिल है। इस काम से होने वाली आमदनी से जहां
कोई कैदी अपने परिवार का पेट पाल रहा है, तो वहीं कोई अपने मुकदमे के लिए
वकील को फीस दे रहा है।
पैसे से भर रहे हैं बच्चों की फीस
उम्रकैद की सजा काट रहे कैदी रमेश यादव ने बताया कि न्यायालयों के लिए
फर्नीचर तैयार करके उन्हें बेहद खुशी मिल रही है। उनके दिल में कभी ये
ख्याल नहीं आया कि जिस कोर्ट ने उन्हें सजा सुनाई थी, आज वो उसी को सजा रहे
हैं। कोर्ट ने तो बस उन्हें उनके बुरे कर्मों की सजा सुनाई थी। वहीं, कैदी
शैलेश तिवारी ने कहा कि फर्नीचर बनाने से उन्हें जो पैसा मिलता है, उसे वो
बच्चों की पढ़ाई के लिए घर भेज देते हैं। ताकि उनका भविष्य अंधेरे में न
रह जाए।

