अब मानदेय के लिए नहीं भटकेगें शिक्षा प्रेरक
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जौनपुर। सालों से मानदेय के लिए भटकने वाले प्रेरकों को शासन ने बड़ी राहत दे दी है। अब उन्हें मानदेय के लिए परेशान नहीं होना पड़ेगा। बीएसए और एबीएसए के संयुक्त हस्ताक्षर से उनके खातों में मानदेय पहुंच जाया करेगा। नई नीति आने से प्रेरकों के चेहरे की मुस्कान बढ़ गई है। प्रेरकों को लोक शिक्षा केंद्रों का मुखिया बनाया गया है। जो गांवों में 15 साल से ज्यादा के उम्र के निरक्षरों को साक्षर बनाने का काम करते हैं। 2 हजार के मानदेय में शिक्षा की अलख जगाने का काम करते आए हैं। मानदेय दिए जाने का मार्ग खासा कठिन रहा है। पहले प्रधान और प्राथमिक स्कूल के प्रधानाध्यापक के संयुक्त हस्ताक्षर से इन्हें मानदेय दिया जाता रहा है। जिसमें तमाम अघ्चने भी आती रहीं हैं। बाद में शासन ने संशोधन करके प्रधानाध्यापक और खंड विकास अधिकारी के संयुक्त हस्ताक्षर से मानदेय दिए जाने की व्यवस्था की। लेकिन इससे भी लाभ नहीं मिला। नए शासनादेश के अनुसार विभाग के दो मुखियाओं के हस्ताक्षर से मानदेय दिए जाने की आदेश दिया। मानदेय की मद में आए धन को प्रेरकों के खातों में भेजने के लिए बीएसए और एबीएसए के हस्ताक्षर कर सकेंगे। जिले स्तर पर बीएसए और ब्लाक स्तर पर खंड शिक्षाधिकारी के हस्ताक्षर से प्रेरकों को मानदेय दिया जाएगा। जल्द की बकाए की धनराशि प्रेरकों के खाते में पहुंच जाएगी।
