अल्लामा इकबाल ने रवायती शायरी को अलविदा कहकर धर्म और देश को अपना विषय बनाया : डॉ अब्बास

जौनपुर। पेगम्बरी कविता और स्वस्थ मूल्यों के प्रवक्ता बनाने वाले कवियों के नाम अल्लामा इकबाल है। इकबाल कविता शुरू रवाेती अंदाज में ही हुआ था .दाग की शागिर्दगी के कारण कृत्रिम सौंदर्य और प्रेम की गलियों की धूल भी छानी मगर बहुत जल्दी इस तंग वातावरण में घुटने लगा जिसके बाद उन्होंने रवायती शायरी को अलविदा कहकर धर्म और देश को अपना विषय बनाया और देश की बौद्धिक और इस्लाम धर्म के निराश मुसलमानों में नया जोश भर कर महान शायर बन गए उपरोक्त बातें लखनऊ विश्वविध्यालय के उर्दू विभाग के अध्यक्ष डॉ अब्बास रज़ा नय्यर ने मोहम्मद हसन पोस्ट ग्रेजुएट कॉलेज के हॉल में सोमवार को इकबाल की शायरी विषय पर आयोजित कार्यक्रम में छात्र छात्रों को बतौर मुख्य अतिथि संबोधित करते हुए कही।
 उन्होंने कहा कि अल्लामा इकबाल इस कवि का नाम है जिन्होंने भारत में उर्दू साहित्य को नई विधा दी। उनके जीवन पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि अल्लामा इकबाल की यात्रा यूरोप काव्य क्षमता को नई दिशा देने और दिमाग के विस्तार में फायेदेमंद साबित हुआ यूरोप में रहने के दौरान उन्होंने पश्चिमी संस्कृति और व्यावहारिक राजनीति का गहराई से अध्ययन किया यूरोप का विकास और एशिया की मायूसी का रहस्य जाना यूरोप की धूल के कण कण में इन्हें एक धड़कता हुआ दिल नजर आया जो उर्जा से लबरेज़ था दूसरी ओर एशिया में इन्हें हर चीज सपने की तरह नज़र आया जिस से इकबाल का दिल तड़प उठा और उनके दिल में अपने लोगों के लिए सहानुभूति उमड़ आई ] गुलाम भारत में जब सभी देशवासी हीन भावना के शिकार हो गए थे और इस्लाम धर्म से जुड़े लोग भी निराश हो गए तो अल्लामा इकबाल ने अपनी शायरी से मृत दिल में जोश पैदा किया और जीवन स्नेह अवधारणा पेश किया। उन्होंने नें कहा कि अल्लामा इकबाल अपनी शायरी में बौद्धिक और कलात्मक के कारण संग मेल खाते हैं उनमें दर्द गुदाज़ से लबरेज़ शख्सियत का ऐसा कलात्मक अभिव्यक्ति है जिसने उर्दू शायरी में एक नया क्रांति पैदा किया और उर्दू शायरी को रवायती गज़ल से निकालकर उसमें व्यक्त और मीडिया के नए नए संभावनाएं पैदा किए कि आज किसी भी मानना अभिव्यक्ति लिये उर्दू शायरी को तंग दामानी की शिकायत की क्षमता नहीं रही] अध्यक्षी भाषण में कॉलेज प्रिंसिपल डॉ अब्दुल कादिर खान ने कहा कि अल्लामा इकबाल वह क्रांतिकारी शायर हैं जिन्होंने अपनी चिंता से निराश भारतीयों में जोश बख्शा और गुलामी से देश को मुक्त कराने के लिए मुर्दा मायूस दिलो को ताजा किया इसके आलावा कार्यक्रम को मौलाना मनाजरुल हसनेन ने भी संबोधित किया इससे पूर्व आए हुए मेहमानों का स्वागत डॉ। अब्दुल कादिर ने माल्यार्पण कर किया इस अवसर पर मास्टर अल्वी, डॉ अंजुम, तरन्नुम फातिमा, डॉ कमर उद्दीन, डॉ जीवन यादव, श्याम नारायण पांडेय, अहमद अब्बास सहित कॉलेज के सभी छात्र छात्राए उपस्थित रहे रहे.सञ्चालन विभाग अध्यक्ष डॉ अंजुम बतूल ने किया।

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