कला व कौशल के जानकार थे विश्वकर्मा जीः शैलेन्द्र निषाद

जौनपुर। शिल्पदेव विश्वकर्मा जी अनेक कला व कौशल के जानकार थे। उन्हें शिल्पी व उद्योगों के मूल प्रवर्तक के रूप में जाना जाता है। वह स्वयं एक श्रमिक थे तथा उनके दो पुत्रों में एक असुर व दूसरा वृत्तासुर था। उसने इन्द्र पर आक्रमण किया जिस पर स्वयं विश्वकर्मा जी ने दधीचि की हड्डी से अस्ल बनाया जिससे वृत्तासुर मारा गया। उक्त बातें भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता एवं दीवानी बार एसोसिएशन के पूर्व उपाध्यक्ष शैलेन्द्र निषाद ने कही। हरईपुर स्थित आवास पर हुई गोष्ठी के दौरान उन्होंने बताया कि विश्वकर्मा जी इंजीनियरिंग की प्रथम पुस्तक लिखे, क्योंकि उनमें कला व कौशल था जिससे वे विविध पदार्थों, भवनों, शस्त्रों व औद्योगिक वस्तुओं का निर्माण किये। उनका जन्मदिन भारत में राष्ट्रीय श्रम दिवस के रूप में मनाया जाता है। इस अवसर पर बांके लाल विश्वकर्मा, वेद प्रकाश, लाल बहादुर निषाद, फूलचन्द्र विश्वकर्मा, जित्तन निषाद आदि उपस्थित रहे।

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