मंगल ग्रह पर आने जाने में लगता है दो वर्ष
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जौनपुर। वीर
बहादुर सिंह पूर्वान्चल विश्वविद्यालय के संकाय भवन स्थित कान्फ्रेंस हाल
में विश्वविद्यालय के शिक्षकों से सुप्रसिद्ध वैज्ञानिक पद्मश्री डा.
प्रेमशंकर गोयल, मानद अति विशिष्ट प्रोफेसर, भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान
संगठन (इसरो) बेंगलुरू ने शुक्रवार सायं परस्पर विचार विमर्श किया। इस अवसर
पर विश्वविद्यालय के शिक्षकों ने विज्ञान के विविध रूप, उपग्रह संचार एवं
अंतरिक्ष विज्ञान आदि पर अपने प्रश्न पूछे।
डा.
प्रदीप कुमार प्रवक्ता ने जीपीएस के बारे में प्रयुक्त तकनीकी जानकारी
हासिल की। डा. अजय प्रताप सिंह ने वाह्य अंतरिक्ष में पिंडों, अन्य
आब्जेक्ट्स के विषय में कैसे सटीक स्थिति का आकलन करें की जानकारी हासिल
की। विद्यार्थियों ने ग्रैविटेशनल तरंगों की निष्पत्ति आइंस्टीन द्वारा किए
जाने के विषय में जानकारी प्राप्त की। पृथ्वी के ध्रुवों की शिफ्टिंग के
विषय में, शिफ्टिंग के परिणामों के विषय में प्रो. गोयल ने बताया कि मानवता
के नैतिक जीवन पर इसका कोई असर नहीं होगा। छात्र सौरभ इलेक्ट्रानिक्स
विभाग ने उल्का पिंडों से संचार विषय पर होने वाले प्रभाव की जानकारी ली।
प्रो. गोयल ने बताया कि अति वेग से पृथ्वी पर आने वाले उल्का पिंड द्वारा
पूरा वातावरण धूल से भर जाने के कारण वन जंगल नष्ट होने से डायनासोर्स नष्ट
हुए उपग्रहों को वापस धरती पर लाने की टेक्नोलाॅजी उन्हें कक्षा में
ध्वस्त किए जाने की तकनीक या आवश्यकता के विषय में मंगल पर जाने में कम से
कम एक वर्ष तथा वापस एक वर्ष आने में लगे समय को देखते हुए वहां भारत
द्वारा शटल छोड़े जाने की संभावनाओं पर विद्यार्थियों ने चर्चा की। सूर्य
छह बिलियन वर्ष की उम्र का होकर अपनी मध्य उम्र में है। अगले छह बिलियन
वर्ष और सूर्य की किरणें अभी उपलब्ध रहेंगी।
संचालन
एवं स्वागत करते हुए प्रो. बीबी तिवारी ने बताया कि प्रो. प्रेमशंकर गोयल
1970 के उपरांत से लेकर अद्यतन भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन से जुड़े
रहे। प्रो. गोयल का अहम योगदान भारत सरकार में सचिव पद पर रहते हुए सरकार
में एक नया महत्वपूर्ण मंत्रालय मिनिस्ट्री आॅफ अर्थ साइसेंस प्रारंभ कराने
में रहा है।
इस अवसर पर प्रो. डीडी दूबे,
प्रो. वीके सिंह, डा. एचसी पुरोहित, डा. अजय द्विवेदी, डा. मनोज मिश्र, डा.
रामनारायण, डा. संगीता साहू, डा. बीडी शर्मा, डा. सुनील कुमार, डा. अवध
बिहारी सिंह, डा. आलोक गुप्ता, डा. एसपी तिवारी, डा. रशिकेष, डा. कार्तिकेय
शुक्ला, डा. विवेक पाण्डेय सहित विद्यार्थी उपस्थित रहे।

