एमएलसी चुनाव में भीतरधात करने वाले मन्त्रियों और पदाधिकारियो के ऊपर गाज गिरनी तय
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लखनऊ। यूपी के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने फिर एक बार अपनी कैबिनेट में छंटनी करने का मन बना लिया है। अखिलेश अपनी टीम में परफार्मेंस के आधार पर एक बार फिर फेरबदल कर जनता में सख्त सरकार का सन्देश देना चाह रहे हैं। यही वजह है कि उत्तर प्रदेश सरकार में जल्द ही एक और कैबिनेट विस्तार की चर्चा तेज हो गई है। सूत्रों की मानें तो इस विस्तार मे जहां कुछ मन्त्रियों की छुट्टी तय है, वहीं अम्बिका चौधरी जैसे नेताओं की वापसी की सम्भावना है।हाल के एमएलसी चुनाव में सपा प्रत्याशियो के लिए भीतरधात कर हरवाने वाले मन्त्रियों और पदाधिकारियो के ऊपर गाज गिरनी तय है। वहीं कुछ अच्छे कार्य करने और अपने एमएलसी को जिताने वाले पदाधिकारियो को मुख्यमंत्री ने अच्छा काम देने की योजना बनाई हैं।
गौर करने की बात यह है कि इस विस्तार में कुछ मन्त्रियों को महत्वपूर्ण विभाग की जिम्मेदारी दी जा सकती है, तो कुछ राज्यमन्त्रियों को दूसरे विभाग में भेजा जा सकता है। राजा भैया के बारे में कयास यह लग रहे हैं कि उनको उनके पुराने विभाग में वापसी कराई जा सकती है। जबकि खाद एवं रसद विभाग के राज्यमन्त्री हेमराज वर्मा को अन्य विभाग की जिम्मेदारी मिल सकती है। इस फेरबदल में एमएलसी चुनाव के परिणाम के अनुसार मंत्रियों के कद बढ़ाये व घटाए जा सकते हैं। नए एमएलसी में से कुछ की ताजपोशी होने की सम्भावना है। कुछ के बारे में कयास लगाये जा रहे हैं कि वे मन्त्री बनकर मन्त्रीमन्डल की शोभा बढ़ाएंगे। उनमें से ज्यादातर मुख्यमन्त्री के कोर कमेटी के लोग हैं। इन पर मुख्यमन्त्री का भरोसा और विश्वास दोनों कायम है। मुख्यमन्त्री के खासमखास लोगों में सुनील साजन, आन्नद भदौरिया, उदयवीर सिंह मुख्य हैं जिनको मन्त्रिमन्डल में जगह मिलने की सम्भावना ज्यादा है। साथ ही कुछ पुराने भरोसेमन्द राज्यमंत्रियों को कैबिनेट मन्त्री का तमगा लगाया जा सकता है उनमे नितिन अग्रवाल, अभिषेक मिश्रा और पवन पान्डेय प्रमुख हैं। इस फेरबदल में कुछ पुराने मन्त्रियों जिनकी शिकायतें ज्यादा हैं उनके पर कतरने की भी तैयारी कर ली गयी है। कुछ मन्त्रियों को मन्त्री पद से हटाकर संगठन का काम दिया जा सकता है। बीते तीन उपचुनावों में जिन दो जगहों पर पार्टी को हार का मुंह देखना पड़ा है, वहां के मन्त्रियों और पदाधिकारियों को नुकसान हो सकता है। उपचुनावों में हुए नुकसान और आ रहे सर्वे पोल से घबराई सपा उन पुराने मन्त्रियों के बारे में भी सोचने लगी है, जिनको बर्खास्त किया गया था या फिर जिनको महत्वपूर्ण विभाग से महत्वहीन विभाग का कार्यभार दिया गया था। इनमे मुख्य रूप से राजा भैया भी हैं। राजा भैया की पुराने विभाग में वापसी कराई जा सकती है। समाजवादी पार्टी के कद्दावर नेता अम्बिका चौधरी की वापसी की भी सम्भावना है। साथ ही स्वतन्त्र प्रभार वाले विभाग में तैनात कई राज्यमन्त्रियों को हटाकर कहीं और समायोजित किया जा सकता है। वहीं खाद्य एवं रसद विभाग के राज्यमन्त्री हेमराज वर्मा को वर्तमान विभाग से हटाकर किसी और विभाग की जिम्मेदारी दी जा सकती है। यह फेरबदल कर अखिलेश अपनी पार्टी व सरकार में इस चुनावी वर्ष में अपनी धमक का सन्देश देने की कोशिश कर रहे हैं।
