20 वर्षो से जिंदगी और मौत के बीच जंग कर रही महिला का डॉ 0 लालबहादुर ने बचाई जान
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जौनपुर। जिले प्रख्यात सर्जन डा0 लालबहादुर सिध्दार्थ ने मंगलवार की देर रात एक और करिश्मा करते हुए एक ऐसी महिला का आपरेशन करके जान बचा लिया जो पिछले 20 वर्षो से विमारी से झेल रही थी। महिला के परिवार वाले उसका इलाज कराने के लिए जौनपुर और आजमगढ़ डाक्टरो के पास ले गये लेकिन किसी डाक्टर ने हाथ लगाने से मना कर दिया। डा0 सिध्दार्थ को उसकी जान बचाने के लिए आपनी पांच सदस्यीय टीम के साथ ढाई घंटे तक कड़ी मशकत करनी पड़ी। डा0 के अनुसार अब महिला पूरी तरह से खतरे से बाहर है।
जौनपुर जिले के खेतासराय थाना क्षेत्र के लखमापुर गांव की निवासी मुसर्रफ जहां के गाल पर 20 वर्ष पूर्व एक गिल्टी दिखाई पड़ी पहले परिवार वाले ने अगल बगल के डाक्टरो को दिखायी लेकिन यह गिल्टी ठीक होने बजाया धीरे धीरे बढ़ता गया। बाद में डाक्टरो ने उसे कैंसर घोषित कर दिया। साथ ही डॉक्टरो ने उसके परिजन को यह भी हिदायत दे डाला कि इसका आपरेशन कत्तई न कराए। घर वाले उसे अपने घर पर रखकर देशी इलाज करने लगे सही इलाज न होने के कारण गिल्टी की साइज बढ़ती गई और मुशर्रफ का दर्द बढ़ता गया। असहनीय पीड़ा को देखते हुए परिवार वाले एक सप्ताह पूर्व डॉ 0 सिद्धार्थ के पास ले गए। डॉ 0 जाँच कराया तो वह कैंसर नहीं बल्कि ट्यूमर निकला। मंगलवार की रात डॉ 0 लालबहादुर ने अपने सहयोगी डॉ 0 राजेश त्रिपाठी , डॉ 0 अनिल कुमार और स्टाफ राजेंद्र सिद्धार्थ विनोद यादव के साथ करीब ढाई घंटे की कड़ी मश्कत के बाद आपरेशन करके करीब एक किलो का ट्यूमर निकलकर मरीज की जान बचायी।
आपरेशन के बाद जहां मरीज को आराम मिला वही 20 वर्षो बाद उसके परिवार वालो के चहरे पर ख़ुशी दिखाई दे रही है। मरीज के भाई सेराज अहमद ने बताया कि जिस दिन से डक्टरो ने कैशर बताया था उसी दिन से हम लोगो घर कोई त्योहार ख़ुशी के माहौल में नहीं मनाया गया था।
जौनपुर जिले के खेतासराय थाना क्षेत्र के लखमापुर गांव की निवासी मुसर्रफ जहां के गाल पर 20 वर्ष पूर्व एक गिल्टी दिखाई पड़ी पहले परिवार वाले ने अगल बगल के डाक्टरो को दिखायी लेकिन यह गिल्टी ठीक होने बजाया धीरे धीरे बढ़ता गया। बाद में डाक्टरो ने उसे कैंसर घोषित कर दिया। साथ ही डॉक्टरो ने उसके परिजन को यह भी हिदायत दे डाला कि इसका आपरेशन कत्तई न कराए। घर वाले उसे अपने घर पर रखकर देशी इलाज करने लगे सही इलाज न होने के कारण गिल्टी की साइज बढ़ती गई और मुशर्रफ का दर्द बढ़ता गया। असहनीय पीड़ा को देखते हुए परिवार वाले एक सप्ताह पूर्व डॉ 0 सिद्धार्थ के पास ले गए। डॉ 0 जाँच कराया तो वह कैंसर नहीं बल्कि ट्यूमर निकला। मंगलवार की रात डॉ 0 लालबहादुर ने अपने सहयोगी डॉ 0 राजेश त्रिपाठी , डॉ 0 अनिल कुमार और स्टाफ राजेंद्र सिद्धार्थ विनोद यादव के साथ करीब ढाई घंटे की कड़ी मश्कत के बाद आपरेशन करके करीब एक किलो का ट्यूमर निकलकर मरीज की जान बचायी।
आपरेशन के बाद जहां मरीज को आराम मिला वही 20 वर्षो बाद उसके परिवार वालो के चहरे पर ख़ुशी दिखाई दे रही है। मरीज के भाई सेराज अहमद ने बताया कि जिस दिन से डक्टरो ने कैशर बताया था उसी दिन से हम लोगो घर कोई त्योहार ख़ुशी के माहौल में नहीं मनाया गया था।

