स्वार्थ के आहुति की प्रेरणा देता है यज्ञ
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जौनपुर। गायत्री प्रज्ञा मण्डल जज कालोनी में 9 कुण्डीय महायज्ञ एवं संस्कार महोत्सव के द्वितीय दिवस का शुभांरभ योग से किया गया । शान्तिकुन्ज हरिद्वार से प्रशिक्षित योगाचार्य अभिषेक मिश्र श्रद्धालुओं को सूर्य नमस्कार और विभिन्न प्राणायामों को करने की विधि बतायी। इसके पश्चात नौ कुण्डीय गायत्री महायज्ञ आरंभ हुआ जिसमें सैकड़ों श्रद्धालुओं ने भाग लिया। शान्ति कुन्ज से आये राजकुमार भृगु ने कहा कि यज्ञ की प्राचीन वैदिक परंपरा राष्ट्र व समाज हित में समाज हित में अपने व्यक्तिगत स्वार्थ की आहुति देने की प्रेरणा देता है। आज विश्व वैज्ञानिक विकास के चरम शिखर पर पहुंच चुका है। परन्तु बिना नैतिक उत्थान के शान्ति और सुखी समाज की कल्पना असंभव है। यज्ञ लोपोपकारी जीवन जीने की प्रेरणा देता है। व्यक्ति द्वारा मानवता के हित में किया गया कर्म यज्ञ है। यज्ञ पांच पारियों में संपनन हुआ। इसके बाद भक्ति गीतों का सिलसिला शुरू हुआ। आचार्य देश बन्धु पद्माकर मिश्र ने कहा कि यज्ञ का अर्थ है ज्ञान। ज्ञान वह विद्या है जिसमें परमार्थ नैतिकता का विकास होता है। इस अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया।

