बन्द हो स्ववित्त पोषित शिक्षकों का शोषण

  जौनपुर। वीर बहाुदर सिंह पूर्वान्चल विश्वविद्यालय के स्ववित्त पोषित महाविद्यालयों के शिक्षकों का निश्चित वेतन निर्धारण तथा सेवा नियमावली बनाये जाने की मांग को लेकर उच्च शिक्षा उत्थान समिति के प्रदेश महामंत्रीजेपी सिंह के नेतृत्व में सोमवार को जिला मुख्यालय पर प्रदर्शन कर प्रधानमंत्री व मानव संसाधन विकास मंत्री को सम्बोधित ज्ञापन सिटी मजिस्ट्रेट को सौपा गया। इस दौरान प्रदेश महामंत्री ने बताया कि प्रदेश मेें लगभग 4500 स्ववित्त पोषित महाविद्यालय हैं। जिसमें 80 हजार शिक्षक कार्यरत हैं। जिनकी कोई सेवा नियमावली नहीं है। इनका निश्चित वेतन नहीं है। इनको वेतन के नाम पर सात से आठ हजार रूपये दिया जाता है और बड़े पैमाने पर शोषण किया जाता है। शिक्षक परिवार अमानवीय पीड़ा झेलने पर विवश है। विश्वविद्यालय के शिक्षकों का वितरण आन लाइन नही है। इनका भौतिक सत्यापन नहीं है। शिक्षक और प्राचार्य केवल महाविद्यालय और विश्वविद्यालय के अभिलेखों में ही दर्ज हैं। जिसकें कारण बड़ा शिक्षक अनुमोदन घोटाला है। एक शिक्षक कई महाविद्यालयों में अनुमोदित है। स्ववित्त महाविद्यालय शिक्षक को किसी प्रकार की कोई असिस्टेट प्रोफेसर वाली सुविधायें तथा अधिकार नहीं मिलते। शिक्षक अमानवीय दशा का शिकार है तथा न्युनतम जीवन स्तर जीेने के लिए बाध्य हैं। उन्होने मांग किया कि ऐसे शिक्षकों का विवरण आनलाइन कर केन्द्रीय कृत डाटा वेस तैयार किया जाय तथा शिक्षकों के आधार नम्बर से लिंग किया जाय। प्राचार्य शिक्षकों का भौतिक सत्यापन किया जाय। मूल प्रमाण पत्रों की जांच कर उनका सत्यापन किया जाय। निश्चित वेतन निर्धारण किया जाय एवं शिक्षकों की सेवा नियमावली बनायी जाय। शिक्षकों को वह सभी सुविधायें दी जायजो अनुदानित महाविद्यालयों के शिक्षकों को मिलती है। इस अवसर पर डा0 जितेन्द्र मिश्र, डा0 अनिल सिंह, डा0सुधाकर शुक्ला, अनूप सिंह आदि मौजूद रहे।


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