निर्मल मन जन सो मोहि पावा
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जौनपुर। सुइथाकला -विकासखण्ड स्थित ईशापुर गांव में सद्भावना सम्मेलन के तत्वावधान में सतगुरुदेव सतपाल महाराज के शिष्य महात्मा मुनीशानन्द जी महाराज ने कथा के माध्यम से सत्संग की महिमा का निरूपण किया। कथा के अनुक्रम में श्री संत ने कहा कि सत्संग से मन सहज भाव को प्राप्त करता है और इन्द्रियजन्य जन्य विकार स्वयं नष्ट हो जाते हैं, तब मन निर्मल हो जाता है और परमात्मा को प्राप्त करने का एकमात्र सहज साधन निर्मल मन हीं है। भगवान स्वयं इसका वर्णन करते हुए कहते हैं -निर्मल मन जन सो मोहि पावा। मोहिं कपट छल छिद्र न भावा।। इस प्रकार सत्संग ही सभी मंगल का आधार है, तथा उसी से सारी सिद्धियाँ सहजता से प्राप्त हो जाती है। सत्संग में रत जीव के ऊपर जब परमात्मा की कृपा होती है तब जीव में विवेक जागृत होता है और वह ब्रह्म के सानिध्य में पहुंच जाता है, जहां उसे सांसारिकता जन्य विकारों से मुक्ति मिल जाती है। परमात्मा को अपना मानना और अपने को भगवान का मानना यह अन्तर्मुखता है। ब्रत,तप,तीर्थाटन आदि करने से जो लाभ होता है उससे कई गुना लाभ भगवान से अपनेपन की भावना से होता है। परमात्मा सर्वत्र है,सुलभ है, लेकिन ऐसे परमात्मा का अनुभव कराने वाले महात्मा दुर्लभ है। ऐसे महात्मा का संग मिल जाय तो जीवन में रंग आ जाय। कथा समापन अवसर पर उपस्थित ग्राम विकास अधिकारी रवींद्र प्रसाद सिंह ने सत्संग की महिमा बताते हुए कहा कि बड़े भाग्य से हीं मनुष्य को सत्संग की प्राप्ति होती है, जहां बिना प्रयास के हीं प्राणी इस संसार रूपी भव सागर से पार हो जाता है। कथा का आयोजन युवा समाजसेवी कृष्ण कुमार श्रीवास्तव ने किया। इस अवसर पर कमलेश चन्द श्रीवास्तव, विक्रमजीतसिंह,सन्दीप श्रीवास्तव,समर बहादुर सिंह,छोटे लाल आदि उपस्थित रहे।

