मुंशी प्रेमचन्द ने समाज को अपने एक एक शब्दों से नई सोच दिया है
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जौनपुर । देश में शोषण के खिलाफ कलम के माध्यम से आवाज उठाने वाले उपन्यास सम्राट मुंशी प्रेम चन्द के जयन्ती पर रविवार को वरिष्ठ पत्रकार पं० चन्द्रेश मिश्र की अध्यक्षता मे एक संगोष्ठी उनके हुसैनाबाद स्थित पर हुई। जिसमे उपन्यास सम्राट प्रेमचन्द के जीवन पर विस्तार से चर्चा के दौरान कहा गया कि मुंशी प्रेमचन्द ने देश दुनियां सहित समाज को अपने एक एक शब्दों से नई सोच दिया है । डा० पीसी विश्वकर्मा जौनपुरी ने उन्हे स्वतंत्र भारत का स्वप्न दृष्टा बताते हुए कहा कि उनकी रचनाआं से देश का संविधान तैयार करने मे सम्बल मिलने के कुछ संकेत मिलते हैं । प्रेमचन्द ने बड़ी कठोरता के साथ महाजनी सभ्यता लिखा और बताया कि यह देश को दीमक की तरह चाल रही है । उनका मानना था कि सामजिक परिवर्तन के बिना देश खड़ा नही हो सकेगा । पं० चन्द्रेश मिश्र ने कहा कि प्रेमचन्द के साहित्य ने पीड़ित वर्ग की ब्यथा को समाज तक पहुंचाने का विलक्षण प्रयास किया । इनका सम्पूर्ण लेखन दो विश्व युद्धो के बीच प्रदेश मे आम जनता की आवाज बनी थी । वे भारत के आजादी की लड़ाई मे कलम से संघर्ष करते रहे । संगोष्ठी मे तिलकधारी निषाद, रवि श्रीवास्तव गुड्डू, फूलचन्द भारती, रामकृष्ण तिवारी राजेश उपाध्याय, आरपी ओझा आदि उपस्थित रह कर अपने विचार व्यक्त किया।

