ड्रेस वितरण में ठीकेदारी प्रथा को रोकने के लिए डीएम ने उठाया कदम
https://www.shirazehind.com/2016/07/d-m_15.html
जौनपुर। जिलाधिकारी भानुचन्द्र गोस्वामी इस समय प्राथमिक शिक्षा की बुनियाद मजबूत कर रहे है। इसी शिक्षा की इमारत के भरोषे वे ग्रामीण इलाके में सिलाई कढ़ाई करके जीवन यापन करने वाली महिलाओं की आर्थिक स्थिति मजबूत करने का प्रयास शुरू किया है। उन्होंने शिक्षा विभाग से जुड़े अधिकारियो की एक बैठक करके आदेशित किया कि प्राथमिक विद्यालयों के छात्र - छात्राओं का ड्रेस अब बड़े ठीकेदारों से न खरीदकर बल्कि गांव में सिलाई कर रही महिलाओं से ही सिलवाया जाय।
मालूम हो कि प्राथमिक विद्यालयों के बच्चों को सरकार द्वारा मुफ्त ड्रेस वितरण किया जाता है। इस ड्रेस वितरण का ठीका विभागीय अधिकारी अपने चहेते ठीकेदारों , दुकानदार को देकर बन्दर बाट करते चले आ रहे है। जबकि शासन का आदेश है कि सभी छात्र - छात्राओं की नाप लेकर ड्रेस सिलवाकर दिया जाय। जिलाधिकारी ने इस बार ठीके प्रथा को दूर करने के लिए शिक्षा विभाग के अधिकारियो को निर्देशित किया कि वे गांव में चल रही महिला समूह जो सिलाई कढ़ाई करती हो उन्ही से ड्रेस सिलवाया जाय। डीएम ने शिराज़ ए हिन्द डॉट काम को बताया कि इससे जहाँ गुणवक्ता युक्त बच्चों के नाप के ड्रेस सिला जायेगा वही ग्रामीण क्षेत्र में सिलाई करके जीवन यापन करने वाली महिलाओं को काम मिल जायेगा।
उधर शिक्षकों का अपना अलग रोना है। प्राथमिक शिक्षक संघ के अध्यक्ष अरविन्द शुक्ल ने बताया कि एक ड्रेस के लिए मात्र 200 रूपये मिलता है जिसमे सौ रुपए कपड़े के लिए और सौ रूपये सिलाई के लिए होता है। इतने कम पैसे में कोई दर्जी कपडे सिलने को तैयार नहीं है। रही बात गांव की महिला दर्जी की शायद ही किसी गांव एक या दो मिलेगी अगर उन्हें एक साथ तीन सौ बच्चों का ड्रेस सिलने के लिए दिया गया तो वो तीन से चार महीने में सिलकर दे पायेगी।
मालूम हो कि प्राथमिक विद्यालयों के बच्चों को सरकार द्वारा मुफ्त ड्रेस वितरण किया जाता है। इस ड्रेस वितरण का ठीका विभागीय अधिकारी अपने चहेते ठीकेदारों , दुकानदार को देकर बन्दर बाट करते चले आ रहे है। जबकि शासन का आदेश है कि सभी छात्र - छात्राओं की नाप लेकर ड्रेस सिलवाकर दिया जाय। जिलाधिकारी ने इस बार ठीके प्रथा को दूर करने के लिए शिक्षा विभाग के अधिकारियो को निर्देशित किया कि वे गांव में चल रही महिला समूह जो सिलाई कढ़ाई करती हो उन्ही से ड्रेस सिलवाया जाय। डीएम ने शिराज़ ए हिन्द डॉट काम को बताया कि इससे जहाँ गुणवक्ता युक्त बच्चों के नाप के ड्रेस सिला जायेगा वही ग्रामीण क्षेत्र में सिलाई करके जीवन यापन करने वाली महिलाओं को काम मिल जायेगा।
उधर शिक्षकों का अपना अलग रोना है। प्राथमिक शिक्षक संघ के अध्यक्ष अरविन्द शुक्ल ने बताया कि एक ड्रेस के लिए मात्र 200 रूपये मिलता है जिसमे सौ रुपए कपड़े के लिए और सौ रूपये सिलाई के लिए होता है। इतने कम पैसे में कोई दर्जी कपडे सिलने को तैयार नहीं है। रही बात गांव की महिला दर्जी की शायद ही किसी गांव एक या दो मिलेगी अगर उन्हें एक साथ तीन सौ बच्चों का ड्रेस सिलने के लिए दिया गया तो वो तीन से चार महीने में सिलकर दे पायेगी।

