प्रदूषित जल से संक्रामक रोगों का प्रसार
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जौनपुर। प्रदूषित जल और गंदगी के चलते जनपद में टाइफाइड और पीलिया सहित हेपेटाइटिस बी के रोगियों के संख्या में लगातार इजाफा हो रहा है। स्वास्थ्य विभाग सहित नगर पालिका के अधिकारी कुंभकर्णी नींद में मस्त हैं। सरकारी अस्पताल में इन मरीजों के उपचार हेतु अलग से कोई व्यवस्था न होने के कारण मरीजांे को प्राइवेट अस्पतालों में शरण लेना पड़ रहा है। जहां इनका भरपूर शोषण हो रहा है। हेपेटाइटिस-बी एक तरह का मच्छर जनित रोग है। जो मच्छरों के काटने से लोगों को के बीच फैल रहा है। इस बीमारी की चपेट में आने से रोगी के लीवर में सूजन आ जाता है। भूख का लगना बन्द हो जाता है। हर समय बुखार का असर रहता है। कमजोरी के साथ साथ वजन भी घटने लगता है। हीमोग्लोबिन की मात्रा कम हो जाती है। इलाज में देरी होने पर यह रोग मौत का कारक भी बन जाता है। जनपद में इस रोग की चपेट में मरीज वाराणसी, इलाहाबाद, दिल्ली आदि बड़े व प्राइवेअ अस्पतालों में अपना उपचार करा रहे है। यहां भी प्राइवेट अस्पतालों में इनकी संख्या अधिक है। इस रोग से पीड़ित मरीजों के उपचार हेतु जो व्यवस्थायें व दवायें जरूरी है। वह जिला अस्पताल में न होने के कारण मरीजों को प्राइवेट व बाहरी जनपदों में उपचार हेतु जाना पड़ता है। इसे स्वास्थ्य विभाग की घोर लापरवाही मानी जा रही है। प्रशासन अथवा स्वास्थ्य विभाग जरा भी इसके प्रति गंभीर नजर नहीं आ रहा है। जहां तक प्रश्न है टाइफाइड व पीलिया का ये दोनों संक्रामक बीमारियां प्रदूषित जल के सेवन के कारण तेजी से अपना पांव पसारे है। जनपदवासियों खासकर शहरी लोग प्रदूषित पानी पीने को मजबूर हो गये है। क्योकि नगर परिषद द्वारा आपूर्ति होने वाला जल प्रदूषित होता है। जलापूर्ति वाली पाइप लाइनें 50 फीसदी जर्जर व टूटी है। नगर पालिका परिषद उनकी मरम्मत या बदलने का सार्थक प्रयास आज तक नहीं किया। इसके अलावा जमीन के नीचे भूगर्भ जल में भी आर्सेनिक तेजी से बढ़ रहा है जिसके कारण भूगर्भ जल भी प्रदूषित हो गया है। इसका भी सेवन करना लोगों की विवशता है। टाइफाइड और पीलिया से ग्रसित मरीज को बुखार के साथ भूख का लगना बन्द हो जाता है। कमजोरी आ जाती है। चिकित्सक से लम्बा उपचार कराने के बाद ही पीड़ित स्वस्थ हो पाता है। इस प्रकार प्रदूषित जल व मच्छर जनित संक्रमित बीमारी को फैला रहे है। मच्छरों को मारने के लिए शासन स्तर से फागिग कराने व दवाओं के छिड़काव हेतु नगर परिषद व मलेरिया विभाग सीएमओ के पास बजट दिया जाता है। प्रदूषित जल का शुद्ध करने का प्रयास नगर परिषद द्वारा नहीं किया जा रहा है। पाइप लाइने नई करा देने पर प्रदूषित जल से काफी राहत संभव है।

