दुर्व्यवस्थाओं के बीच चलते कोचिंग सेण्टर
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जौनपुर । पढ़ाई के नाम पर निजी विद्यालयों के शिक्षकों ने शहर गाँव व कस्बे में कोचिंग सेंटर खोल कर कमाई का जरिया बना रखा है। दुव्र्यवस्थाओं के बीच चलने वाले कोचिग वाले विद्यार्थियो ंपर दबाव बनाकर प्रतिमाह मोटी रकम वसूल रहे हैं। सैकड़ों छात्र व छात्राओं को एक कमरे में बैठाया जा रहा है न तो हवा के लिए पंखा की व्यवस्था है न प्रकाश की। सबसे ज्यादा शहर की स्थिति खराब है। रोडवेज तिराहे से टीडी कालेज तक कोचिग चलाने वालों का दबदबा है। नियमानुसार शिक्षण संस्थानों में कोचिंग नहीं चलायी जा सकती। अन्य विद्यालयों में तथा उसके आस पास व शहर में मोहल्ले, चैराहे, गलियों में फर्जी ढंग से दर्जनों गैर पंजीकृत कोचिंग सेंटर चलाए जा रहे हैं। पांच सौ से एक हजार रुपये प्रति विषय 10 वीं व 12 वीं के छात्र-छात्राओं से कोचिंग संचालक जबरन वसूल रहे हैं, जबकि गैर पंजीकृत कोचिंग सेंटर कहीं से भी वैध नही माने जाते है और तो और तमाम सरकारी एवं राजकीय विद्यालयो मे भी धड़ले से सुबह शाम कोचिग संचालित हो रही है। जिला विद्यालय निरीक्षक कार्यालय की धनवसूली और लापरवाही के कारण आये दिन शहर में एक नया बोर्ड कोचिंग के नाम का दिखाई पड़ रहा है। नया सत्र आते ही जिले में बरसाती मेढक के रूप में कोचिंगो का भरमार हो जाता है और विद्यालयों में पढ़ने वाले बच्चों के अभिवावको का बच्चों के अच्छे मेरीट पाने के नाम पर शोषण किया जा रहा है। जिला प्रशासन मूक दर्शक बना हुआ है। जिससे जिले में अवैध कोचिंग सेंटरों का कारोबार धड़ल्ले से चल रहा है।

