बिना गुरू के गोविंद की प्राप्ति संभव नही
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जौनपुर। तेजीबाज़ार के रामचन्द्रकापुरा गावं में सात दिवसीय संगीतमयी श्रीमद भागवत अमृत कथा का आयोजन किया गया, कथा वाचक बाल व्यास ऋषिदेव शास्त्री ने मंगलवार को तीसरे दिन की कथा में बताया कि धु्रव उत्तानपाद के पुत्र हैं ये उत्तानपाद हमलोग भी हैं, उत्तानपाद का अर्थ हैं कि जिसका पैर ऊपर और सिर नीचे हो और उनकी पत्नी हैं सुरुचि और सुनिती, सुरुचि का अर्थ हैं सुंदर रुचि या सुंदर इच्छाओं वाली और सुनिती का अर्थ हैं सुंदर निति या सुंदर नियम वाली! ध्रुव जी महराज बडे ही कम आयु में भगवान की भक्ति को प्राप्त कर लेते हैं, धु्रव जी महराज के गुरू बाबा नारद महराज जी ध्रुव जी को गुरूमंत्र देते हैं, ऊं नमो भगवते वासुदेव, वह कहते है कि बिना गुरू के ग्यान प्राप्त नही होता और बिना गुरू के भगवद् प्राप्ति संभव नही हैं, बिना गुरू के गोविंद की प्राप्ति संभव नही हैं ! जब गुरू की सन्निधि प्राप्त हो जाती हैं तो गोविंद प्राप्ति और भी सहज हो जाती हैं ! बाल व्यास द्वारा सुनाई जा रही कथा में सहयोगी सुमित कौशिक ,नीरज तथा संगीत में उनका साथ दे रहे विकास सिंह और राजकुमार हैं।

