फर्जी वाहन दौड़ाने की जांच ठण्डे बस्ते में

जौनपुर। प्रदेश के कई जिलों में राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम में फर्जी नंबर पर वाहन दौड़ाने के मामले में शासन दोषियों को रियायत देने के मूड में नहीं हैं। इसे ठण्डे बस्ते में डाल दिया गया है। शासन के कई पत्रों के बाद भी स्वास्थ्य अधिकारियों ने मामला दबा दिया है। दोषी कर्मचारियों पर अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है। इस मामले में अब राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के निदेशक ने जिलाधिकारियों को पत्र भेजा है, जिसमें कार्रवाई की अपेक्षा की है। दर असल सन 2015-16 में आरबीएसके के तहत दौड़ने वाले वाहनों में कई कमियां पकड़ी गई थी। जिले में फर्जी नम्बरों के वाहनों पर विभागीय अधिकारी वाहनों का भुगतान करते रहे। ऐसा कई जिलों में मिला। लखनऊ से जब इसका खुलासा हुआ तो विभाग में खलबली मच गई।आनन-फानन में इस पूरे मामले को दबाने के प्रयास शुरू हो गए। लखनऊ से कार्रवाई के संबंध में पत्र आया तो वाहन स्वामियों पर मुकदमा दर्ज करा कर रिपोर्ट भेज दी गई, जबकि इन वाहनों के अनुबंध करने एवं भुगतान करने के दोषी अधिकारियों एवं कर्मचारियों की जांच की भी जरूरत नहीं समझी गई। मिशन निदेशक आलोक कुमार ने जिला स्वास्थ्य समिति के अध्यक्ष जिलाधिकारियों को पत्र भेज कर उक्त मामले से अवगत कराया है। सीएमओ स्तर से कार्रवाई नहीं हुई है। जिलाधिकारी से उक्त मामले को गंभीरता से लेते हुए कार्रवाई कर आख्या मांगी है।

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