बड़े नोट बंद होने से मची अफरा-तफरी
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जौनपुर। कालेधन के खिलाफ मुहिम के तहत 500 और 1000 हजार के नोट बंद करने के मोदी सरकार के फैसले के दूरगामी परिणाम मिलने में भले ही समय लगे मगर जिले में पड ही गुलाबी ठंड के बीच आम आदमी की जेब से जुडे इस मुद्दे ने चर्चाओं का बाजार गरम कर दिया है। जेब में हजार हजार रूपये के नोट होने के बावजूद लोगों को फौरी तौर पर रोजमर्रा की चीजों के लाले पडे हुये हैं। घर, कार्यालय,सडक,चैराहे और गली कूचे से लेकर रेल और हवाई सफर में भी हर जुबां पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और उनके इस साहसिक फैसले की चर्चा है। आजाद भारत के इतिहास में पहली दफा बिना समय दिये नोट बंद करने के एलान को लेकर मिलीजुली प्रतिक्रिया सामने आ रही है। अभी तक 10 रुपये के सिक्के को चलने न चलने के चक्कर से जनता उबर भी नहीं पायी थी कि 8 नवंबर की आधी रात को एकाएक 5 सौ और एक हजार की नोट बाजार मे बन्द होने से लोगो की रातों से ही नींद उड़ गयी है। एक तरफ सुबह से लोग पांच सौ और 1 एक हजार के नोटों को बदलने के चक्कर मे दर-दर की ठोकरे खा रहे है तथा कोई फुटकर देने के लिए तैयार नहीं है वहीं दूसरी तरफ 5 सौ और एक हजार की नोट होने के बावजूद दवाओं के अभाव मे मरीज जिंदगी और मौत के बीच जूझ रहे है। खाने पीने के सामानों सहित अपनी आवश्यकता की वस्तुओं की खरीदारी भी लोग नहीं कर पा रहे है जिसे लेकर जनता मे भारी आक्रोश दिखाई दे रहा है। हलांकि अर्थव्यवस्था पर नकली नोटों कालेधन और भ्रष्टाचार के नकारात्मक असर को खत्म करने के लिए अब तक का सबसे बड़ा उठाया गया कदम है।पहले से समय सीमा तय किये बगैर अचानक आधी रात से 5सौ और 1 हजार के नोटो को बाजारो मे बन्द होने से पूरे देश में अफरा-तफरी का माहौल कायम हो गया है सवाल यह भी उठता है कि जब देश की पूरी अर्थव्यवस्था भ्रष्ट हो चुकी है तो इसका सकारात्मक नतीजा निकलेगा कि नहीं यह तो आने वाला समय ही बताएगा परंतु इस समय इस समस्या को लेकर चारों तरफ हाहाकार मचा हुआ है। ऐसे मे प्रशासन को भी सर्तक रहना पड़ेगा अपराधियो की निगाह भी नोटो की बदला बदली पर रहेगी

