इमाम हुसैन व उनके साथियों को इस्लाम कभी भूला नहीं सकता : मौलाना अतहर
https://www.shirazehind.com/2016/11/blog-post_747.html
इस्लाम चौक पर रखा गया चेहलुम का ताजिया
जौनपुर। शुक्रवार की रात नगर के मुफ्ती हाउस में मजलिस को खेताब करते हुए कोलकाता से आये मौलाना सै. अतहर अब्बास ने कहा कि कर्बला में हजरत इमाम हुसैन की शहादत के बाद उनके परिवारवालों पर जिस तरह यजीदी हुकुमत ने जुल्म ढाया था आज भी उसकी याद ताजा होते ही आंखों से आंसू छलक जाते है। इमाम की शहादत के बाद चौथे इमाम हजरत जैनुल आब्दीन को कैदी बनाकर कर्बला से कूफा, कूफे से शाम व मदीने की गलियों में घुमाया गया यही नहीं हजरत अली की बेटी जनाबे जैनब को बेपर्दा ऊंटों पर कैदी बनाकर घुमाया गया था। आज हम सब उन्हीं का गम मनाने के लिए इकट्ठा हुए है। इस्लाम उनके कुर्बानी को कभी भुला नहीं सकता। मजलिस के बाद शबीहे ताबूत, अलम व जुलजनाह निकाला गया। अंजुमन में नौहा व सींनाजनी कर कर्बला के शहीदों को नजराने अकीदत पेश किया। इसी क्रम में नगर के पानदरीबा मोहल्ला स्थित इस्लाम की चौक पर शनिवार की रात चेहलुम का ताजिया रखा गया। जिसके बाद बाद मजलिस आयोजित हुई और शब्बेदारी का सिलसिला शुरु हुआ। जो पूरी रात चलता रहा। शब्बेदारी के बीच में जुलूस की शक्ल में शामिल होकर अंजुमन जुल्फेकारिया ने नौहाख्वानी, जंजीर का मातम किया। शब्बेदारी के आखिर में गुलशने इस्लाम ने भी दहकती हुई जंजीर का मातम किया। रविवार को दोपहर दो बजे ताजिया अपनी रिवायती अंदाज में ताजिया चौक से उठाया जाएगा। जो अपने कदीम रास्तों से होता हुआ सदर इमामबाड़ा बेगमगंज पहुंचकर सपुर्दे खाक होगा। गौरतलब हो कि प्रत्येक वर्ष इस्लाम की चौक का चेहलुम एक दिन पूर्व ही मनाया जाता है। पूरे देश में कहीं और चेहलुम न मनाये जाने से इस चेहलुम में शिरकत करने के लिए देश के अधिकांश भागों से जायरीन यहां आते है। इसे एक दिन पूर्व मनाए जाने में इसका अपना एक महत्व है। बताते हैं कि किसी जमाने में मोहल्ला निवासी शेख मोहम्मद इस्लाम एक मामले में फं सा दिए गए थे और जेल हो गई थी। वह अंग्रेजी हुकूमत का दौर था। चेहलुम करीब आते मोहम्मद इस्लाम इस अफसोस में थे कि हर साल की तरह इस साल ताजिया नहीं सजा पायेंगे। लेकिन उन्होंने मन्नत मांगी और एक दिन पहले ही उनकी हथकड़िया और जेल का दरवाजा अपने आप खुल गया। इस चमत्कार को देख अंग्रेजी अफसर भौचक रह गए और उन्हें रिहा कर दिया गया। रिहाई के बाद उसी दिन उन्होंने ताजिया सजा कर रखा और तभी से यह चेहलुम एक दिन पहले ही मना लिया जाता है। शनिवार को रात करीब आठ बजे चौक पर ताजिया रखा गया जिसके हमराह अंजुमने गुलशने इस्लाम नौहा, मातम कर रही थी। वहीं नगर के मुफ्ती मोहल्ला स्थित अली घाट में रविवार रात एक मजलिस का आयोजन किया गया है जिसे डा. सैयद कमर अब्बास खेताब करेंगे। जिसके बाद ताजिया स्थापित की जाएगी।
जौनपुर। शुक्रवार की रात नगर के मुफ्ती हाउस में मजलिस को खेताब करते हुए कोलकाता से आये मौलाना सै. अतहर अब्बास ने कहा कि कर्बला में हजरत इमाम हुसैन की शहादत के बाद उनके परिवारवालों पर जिस तरह यजीदी हुकुमत ने जुल्म ढाया था आज भी उसकी याद ताजा होते ही आंखों से आंसू छलक जाते है। इमाम की शहादत के बाद चौथे इमाम हजरत जैनुल आब्दीन को कैदी बनाकर कर्बला से कूफा, कूफे से शाम व मदीने की गलियों में घुमाया गया यही नहीं हजरत अली की बेटी जनाबे जैनब को बेपर्दा ऊंटों पर कैदी बनाकर घुमाया गया था। आज हम सब उन्हीं का गम मनाने के लिए इकट्ठा हुए है। इस्लाम उनके कुर्बानी को कभी भुला नहीं सकता। मजलिस के बाद शबीहे ताबूत, अलम व जुलजनाह निकाला गया। अंजुमन में नौहा व सींनाजनी कर कर्बला के शहीदों को नजराने अकीदत पेश किया। इसी क्रम में नगर के पानदरीबा मोहल्ला स्थित इस्लाम की चौक पर शनिवार की रात चेहलुम का ताजिया रखा गया। जिसके बाद बाद मजलिस आयोजित हुई और शब्बेदारी का सिलसिला शुरु हुआ। जो पूरी रात चलता रहा। शब्बेदारी के बीच में जुलूस की शक्ल में शामिल होकर अंजुमन जुल्फेकारिया ने नौहाख्वानी, जंजीर का मातम किया। शब्बेदारी के आखिर में गुलशने इस्लाम ने भी दहकती हुई जंजीर का मातम किया। रविवार को दोपहर दो बजे ताजिया अपनी रिवायती अंदाज में ताजिया चौक से उठाया जाएगा। जो अपने कदीम रास्तों से होता हुआ सदर इमामबाड़ा बेगमगंज पहुंचकर सपुर्दे खाक होगा। गौरतलब हो कि प्रत्येक वर्ष इस्लाम की चौक का चेहलुम एक दिन पूर्व ही मनाया जाता है। पूरे देश में कहीं और चेहलुम न मनाये जाने से इस चेहलुम में शिरकत करने के लिए देश के अधिकांश भागों से जायरीन यहां आते है। इसे एक दिन पूर्व मनाए जाने में इसका अपना एक महत्व है। बताते हैं कि किसी जमाने में मोहल्ला निवासी शेख मोहम्मद इस्लाम एक मामले में फं सा दिए गए थे और जेल हो गई थी। वह अंग्रेजी हुकूमत का दौर था। चेहलुम करीब आते मोहम्मद इस्लाम इस अफसोस में थे कि हर साल की तरह इस साल ताजिया नहीं सजा पायेंगे। लेकिन उन्होंने मन्नत मांगी और एक दिन पहले ही उनकी हथकड़िया और जेल का दरवाजा अपने आप खुल गया। इस चमत्कार को देख अंग्रेजी अफसर भौचक रह गए और उन्हें रिहा कर दिया गया। रिहाई के बाद उसी दिन उन्होंने ताजिया सजा कर रखा और तभी से यह चेहलुम एक दिन पहले ही मना लिया जाता है। शनिवार को रात करीब आठ बजे चौक पर ताजिया रखा गया जिसके हमराह अंजुमने गुलशने इस्लाम नौहा, मातम कर रही थी। वहीं नगर के मुफ्ती मोहल्ला स्थित अली घाट में रविवार रात एक मजलिस का आयोजन किया गया है जिसे डा. सैयद कमर अब्बास खेताब करेंगे। जिसके बाद ताजिया स्थापित की जाएगी।

