1090 का उडाया जा रहा माखौल
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जौनपुर। मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के ड्रीम प्रोजेक्ट महिला सुरक्षा हेल्पलाइन 1090 को उसके कर्मी ही पलीता लगा रहे हैं। उक्त हेल्पलाइन पर काल करने पर फोन रिसिव नहीं होता है। यहां तक कि बाद में उक्त नम्बर को ट्रेस तक नहीं किया जाता। आजमगढ़ जनपद के चन्डेसर थाना क्षेत्र निवासी विक्षिप्त नाबालिग किशोरी घर से बगैर किसी को बताए सरपतहाँ थाना अन्तर्गत रूधौली के लिए निकल पड़ी। लेकिन रास्ते में ही शाहगंज बस स्टैंड पर उतर गयी। बदहवास हालत में भटकती किशोरी को देख कर भीड़ लग गयी। वहीं मौजूद गौराबादशापुर निवासी रमेश यादव ने उक्त किशोरी से उसका नाम व पता पूछने का प्रयास किया लेकिन किशोरी कुछ भी बताने में असमर्थ रही। तब रमेश यादव ने किशोरी की मदद के लिए महिला सुरक्षा हेल्पलाइन 1090 पर सम्पर्क करने का प्रयास किया लेकिन कई बार पूरी घन्टी जाने के बावजूद काल नहीं उठी। उक्त युवक ने जिम्मेदारी का परिचय देते हुए किशोरी को स्थानीय राजकीय पुरुष चिकित्सालय पहुंचाया। सूचना पर पहुंची पुलिस ने किशोरी को उसके परिजनों के सुपुर्द करने की कार्रवाई पूरी की। ऐसे में सवाल उठता है कि मुख्यमंत्री की तमाम महत्वाकांक्षी योजनाओं को संसाधनों से लैस होने और भारीभरकम प्रचार प्रसार के बावजूद क्या महिला सुरक्षा हेल्पलाइन पीड़ित व ज़रूरतमंद महिलाओं की मदद के लिये तत्पर है ? कई बार कॉल करने पर भी फोन न उठना और बाद में उक्त नंबर को ट्रेस करके दोबारा संपर्क न करना ये साबित करता है कि यह हेल्पलाइन भी कर्मियों की लापरवाही और अधिकारियों की हीलाहवाली का शिकार हो रहा है। जबकि होना ये चाहिये कि किसी अपुष्ट व अधूरी सूचना पर भी पूरा तंत्र सक्रिय हो जाये, ताकि पीड़ित या ज़रूरतमंद महिलाओं की हरसंभव सहायता की जा सके।

