
जौनपुर। वर्ष 2016 का आखिरी दिन भी बीत रहा है। कभी खुशी-कभी गम के बीच पूरे साल लोग हिचकोले खाते रहे। स्वास्थ्य सेवाओं को पूरे साल संजीवनी की तलाश रही। शिक्षा के मंदिर में इस साल मेधावियों ने कामयाबी का परचम लहराया। हालांकि नकल का खेल भी खूब चला। छात्रों को धरना तक देना पड़ा। बेसिक शिक्षा में भी शिक्षकों की तैनाती में जमकर खेल हुआ। बीते साल सेहत महकमा बीमारी से जूझता रहा। जिला अस्पताल व महिला अस्पताल पहले से ही डॉक्टरों की कमी से जूझ रहे हैं। अस्पतालों में मरीजों को बाहर से दवाएं लिखने व पैसा मांगने की शिकायतें आम रहीं। अवैध वसूली का मामला कई बार प्रकाश में आया लेकिन कार्रवाई के नाम पर कुछ भी नहीं हो सका। कभी सीटी स्कैन मशीन ने दगा दिया तो कभी एक्सरे ने। यही नहीं सीबीसी मशीन की खराबी के कारण भी मरीज परेशान रहे। दोनों अस्पतालों के सीएमएस की कुर्सी पर कई आए और कई गए। ग्रामीण इलाकों के अस्पतालों का सूरतेहाल बदलने की पहल कारगर नहीं हो पाई। सीएमओ व फार्मासिस्टों के बीच पूरे साल विवाद चलता रहा। मानवीय संवेदनाओं का मामला भी खूब उछला। डेंगू ने भी कहर बरपाया, मरीजों को समय से स्ट्रेचर तक नहीं मिल पाया।