ठिठुरते गरीबों के लिए व्यवस्था नदारत
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जौनपुर। जनपद इस समय ठंड की चपेट में है। विगत तीन- चार दिनों से ठंड का कहर और बढ़ गया है। एक तरफ जहां आर्थिक रूप से संपन्न परिवारों के लिए ठंड के मौसम में भोजन का मीनू रोज बदल रहा है, वहीं कुछ लोगों के लिए दिन भर की मेहनत के बाद रात के रोटी की जुगाड़ बढ़ी मुश्किल से हो पा रहा है। दिहाड़ी मजदूर व फुटपाथ पर जीवन यापन करने वालों के लिए यह ठंड मानों कहर बन कर टूट पड़ी है। बिस्तर व कंबल के अभाव में अनेक परिवार अलाव के ही भरोसे है। कही -कही तो वे रद्दी कागज, प्लास्टिक व कचरा जलाकर ठंड भगाने की भरसक कोशिश कर रहे हैं। तहसील व नगर पंचायत द्वारा जगह-जगह अलाव जलवाने, रैन बसेरा बनवाने के दावे तो किए जा रहे हैं, कितु हकीकत कुछ और ही है। वहीं दूर दराज से काम धंधे की तलाश में आए मजदूर, रिक्शा चालक, मोची भी इधर- उधर शरण लेने को मजबूर हैं। जिला मुख्यालय पर ही चन्द स्थानों पर वह भी विशेषकर पुलिस बूथों पर ही अलाव जलता दिख रहा है तहसील और ग्रामीण क्षेत्रों में लोग सरकारी अलाव के लिए तरस रहे हैं। प्रशासन द्वारा शासन के मद से प्राप्त कम्बल कहा बांटे जा रहे है तहसीलदार और कानून गो तक नहीं बता पा रहे है। यह सर्द मौसम वैसे भी गरीबांे के लिए मुसीबत बना हुआ है लेकिन हो जाती है। यह बताने वाला कोई नहीं है।

