भूसा के भाव किसान बेच रहे है अपना धान
https://www.shirazehind.com/2016/12/blog-post_523.html
जौनपुर। किसानो का हिमायती बनने वाले धरती पुत्र मुलायम सिंह के बेटे के राज में किसान बदहाल है। धन क्रय केन्द्रो पर कही बोरे की कमी तो कही चेक न होने के कारण किसानो का धान नही खरीदे जा रहे है जिसके कारण किसान अपनी गाढ़ी मेहनत की कमाई भूसा के भाव बेचने को मजबूर है।
धान की फसल तैयार होने से पहले ही शासन प्रशासन ने धान क्रय केन्द्र पर किसानो के धान खरीदने की तैयारी कर लिया था। जिलाधिकारी की अध्यक्षता में कई बैठके आयोजित करके लक्ष्य के सापेक्ष धन खरीदने की योजना तैयार किया गया था। लेकिन सारा नतीजा सिफर ही दिखाई दे रहा है। किसी केन्द्र पर बोरा न होने की कमी बताकर किसानो का धान नही खरीदा जा रहा है। किसी केन्द्र पर चेक न होने का बहाना करके किसानो को लौटा दिया जा रहा है जिसके कारण किसान अपने धान को बाजारो में एक हजार रूपये प्रति कुंटल बेच रहे है। इस समय बाजारो में भूसा का दाम भी इसी के आसपास है। करंजाकला के किसान राजदेव ने बताया कि मै अपना धान बेचने के लिए क्रय केन्द्र्र पर गया तो वहां पर मौजूद कर्मचारियों ने कहा कि बोरा नही है। मुझे अपने आगे की फसलो की खेती करने के लिए अपने धान को मजबूरी में एक हजार रूपये प्रति कुंटल बेचना पड़ा। जबकि केन्द्र सरकार इसकी कीमत 14 सौ रूपये रखा है। ऐसे में मुझे चार सौ प्रति कुंटल का घाटा हुआ है। इसी तरह से शाहगंज के ब्लाक गोरारी के सदीप कुमार सरपहा के अचल राजभर समेत दर्जनो किसानो का दर्द यही था।
धान की फसल तैयार होने से पहले ही शासन प्रशासन ने धान क्रय केन्द्र पर किसानो के धान खरीदने की तैयारी कर लिया था। जिलाधिकारी की अध्यक्षता में कई बैठके आयोजित करके लक्ष्य के सापेक्ष धन खरीदने की योजना तैयार किया गया था। लेकिन सारा नतीजा सिफर ही दिखाई दे रहा है। किसी केन्द्र पर बोरा न होने की कमी बताकर किसानो का धान नही खरीदा जा रहा है। किसी केन्द्र पर चेक न होने का बहाना करके किसानो को लौटा दिया जा रहा है जिसके कारण किसान अपने धान को बाजारो में एक हजार रूपये प्रति कुंटल बेच रहे है। इस समय बाजारो में भूसा का दाम भी इसी के आसपास है। करंजाकला के किसान राजदेव ने बताया कि मै अपना धान बेचने के लिए क्रय केन्द्र्र पर गया तो वहां पर मौजूद कर्मचारियों ने कहा कि बोरा नही है। मुझे अपने आगे की फसलो की खेती करने के लिए अपने धान को मजबूरी में एक हजार रूपये प्रति कुंटल बेचना पड़ा। जबकि केन्द्र सरकार इसकी कीमत 14 सौ रूपये रखा है। ऐसे में मुझे चार सौ प्रति कुंटल का घाटा हुआ है। इसी तरह से शाहगंज के ब्लाक गोरारी के सदीप कुमार सरपहा के अचल राजभर समेत दर्जनो किसानो का दर्द यही था।

