जौनपुर के लाल का कमाल
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जौनपुर। छोटे और मझेले किसानो के लिए एक अच्छी खबर है। जौनपुर के एक किसान के बेटे ने ऐसे किसानो के लिए एक ऐसी तकनीकी का इजात किया है जिससे वे वेगैर बिजली के हैण्ड पम्प से अपने खेतो की सिचाई कर सकते है। यह मशीन सौर उर्जा इन्वर्टर और बिजली से चलेगी।
जौनपुर में हैण्ड पम्प को आटोमेटिक चला रही यह मशीन इस समय मात्र एक 12 बोल्ट की बैट्री से चल रही है। इस मशीन को बनाने में मात्र चार हजार रूपये की लागत आयी है। हैरत की बात यह है कि किसानो के लिए रामबाण साबित होने वाली इस उपकरण को किसी इंजिनियर ने नही बल्की किसान के एक बेटे ने बनाया। विरेन्द्र यादव नामक युवक ने अपने तीन साथियों के साथ इस तकनीकी का आविष्कार किया है। विरेन्द्र ने बताया कि हम दुबई में एक कम्पनी में काम कर रहे थे। वहां इस तरह की मशीने बनायी जाती थी। उसी समय मुझे पता चला कि हमारे गांव बिजली न मिलने कारण खेत की सिचाई नही हो पा रही है। उसके बाद से हम अपने गांव आकर इस मशीन को बनाने योजना बनाकर काम किया। जिसका परिणाम है कि आज यह मात्र चार हजार रूपये की लागत से तैयार हो गया। विरेन्द्र का दावा है कि छोटे और मझोले किसान इसके माध्यम से अपने खेतो की सिचाई कर सकते है।
जौनपुर में हैण्ड पम्प को आटोमेटिक चला रही यह मशीन इस समय मात्र एक 12 बोल्ट की बैट्री से चल रही है। इस मशीन को बनाने में मात्र चार हजार रूपये की लागत आयी है। हैरत की बात यह है कि किसानो के लिए रामबाण साबित होने वाली इस उपकरण को किसी इंजिनियर ने नही बल्की किसान के एक बेटे ने बनाया। विरेन्द्र यादव नामक युवक ने अपने तीन साथियों के साथ इस तकनीकी का आविष्कार किया है। विरेन्द्र ने बताया कि हम दुबई में एक कम्पनी में काम कर रहे थे। वहां इस तरह की मशीने बनायी जाती थी। उसी समय मुझे पता चला कि हमारे गांव बिजली न मिलने कारण खेत की सिचाई नही हो पा रही है। उसके बाद से हम अपने गांव आकर इस मशीन को बनाने योजना बनाकर काम किया। जिसका परिणाम है कि आज यह मात्र चार हजार रूपये की लागत से तैयार हो गया। विरेन्द्र का दावा है कि छोटे और मझोले किसान इसके माध्यम से अपने खेतो की सिचाई कर सकते है।

