सिद्धांतों की जंग से दलों को परहेज
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जौनपुर। चुनाव की हर गणित अब पूरे शबाब पर है। साथ में तब और अब के माहौल पर चर्चा भी है, विकास का आकलन भी, और सरकार बनाने के दावे भी। अलग- अलग समर्थकों की अलग-अलग सरकार हर दिन बन रही है। कहा तो यहां तक जा रहा है कि यदि फलां पार्टी की सरकार नहीं बनी तो हम अपना चेहरा भी नहीं दिखाएंगे। वहीं एक वर्ग बुद्धिजीवियों का भी है जो आज का चुनावी स्थिति देख कर चिता में डूबा है। वजह कि अब जंग कहीं भी विकास के मुद्दों पर नहीं हो रही। हर जगह जातिवादी चर्चा ही मुख्य है। सिद्धांतों की जंग से भी सभी को परहेज है। वर्तमान चर्चाओं को करीब से सुनें, तो यह सही है कि वोट की गुणा-गणित काफी तेज है। लोभ-लालच का मायाजाल भी खूब फैलाया जा रहा है। राजनीति के इस बदले माहौल में युवा ही सबसे आगे दिख रहे हैं, कितु गांव के बुजुर्ग इसे अच्छा संकेत नहीं मान रहे। वे तो अभी भी गांव के दयनीय हालात पर हर दिन मंथन कर रहे हैं। लोग गुजरा जमाना याद कर रहे हैं और पहले के शोरगुल वाले चुनाव की याद ताजा कर रहे हैं।

