बिना बजट के कैसे होगी परीक्षायें
https://www.shirazehind.com/2017/03/blog-post_9.html
जौनपुर। मार्च के तीसरे हफ्ते में परिषदीय और उच्च परिषदीय विद्यालयों में वार्षिक परीक्षाएं शुरू होनी है। बावजूद इसके जिले में विभागीय अफसर इसके प्रति गंभीर नहीं हैं। शिक्षक संगठन के पदाधिकारियों का कहना है पाठ्यक्रम अधूरा है, वो तो छोड़ ही दीजिए। अभी तक न तो पेपर छपे हैं और न ही स्कीम तैयार हुई है। जिले में करीबन हजारों परिषदीय और उच्च परिषदीय विद्यालय हैं। जिनमें डेढ़ लाख से ज्यादा बच्चे पढ़ते हैं। स्थानीय ंिवभागीय अफसरा लापरवाही करने में कोई कसर नहीं छोड़ते हैं।
परिषदीय स्कूलों की वार्षिक परीक्षाएं 18 मार्च से शुरू हो रही हैं, लेकिन अभी तक परीक्षा के लिए शासन से कोई बजट नहीं आया है। इस कारण परीक्षा की तैयारियां अभी अधर में ही लटकी हुई हैं। बिना बजट के न तो प्रश्न पत्र तैयार हुए हैं और न ही उत्तर पुस्तिकाएं खरीदी गई हैं।
बेसिक शिक्षा विभाग के प्राथमिक एवं उच्च प्राथमिक विद्यालयों में शासन ने परीक्षा का चार्ट बनाकर प्रत्येक जनपद के बेसिक शिक्षा अधिकारी को भेज दिया था। आदेश दिए थे कि चार्ट के आधार पर ही परीक्षाओं की तैयारी पूरी की जानी है। यदि किसी अधिकारी ने इसमें लापरवाही की तो संबंधित अधिकारियों पर कठोर कार्रवाई की जाएगी। अधिकारी शासन से आए चार्ट को लेकर बैठे हुए हैं, लेकिन शासन से बजट न आने के कारण सारा कार्य अधर में लटका हुआ है। दो-तीन दिन बजट और लेट हो गया तो परीक्षा कराने के लिए विभाग के सामने समस्या खड़ी हो जाएगी। विभाग के सामने फिर एक ही विकल्प बचेगा। जिसमें प्रश्नों को ब्लैक बोर्ड पर उतारा जाएगा और छात्र-छात्राएं कापी के पेज पर उनके उत्तर लिखेंगे, जबकि शासन से इस पर रोक लगा रखी है। बजट न होने के कारण बेसिक शिक्षा विभाग को यही कराना पड़ेगा।
परिषदीय स्कूलों की वार्षिक परीक्षाएं 18 मार्च से शुरू हो रही हैं, लेकिन अभी तक परीक्षा के लिए शासन से कोई बजट नहीं आया है। इस कारण परीक्षा की तैयारियां अभी अधर में ही लटकी हुई हैं। बिना बजट के न तो प्रश्न पत्र तैयार हुए हैं और न ही उत्तर पुस्तिकाएं खरीदी गई हैं।
बेसिक शिक्षा विभाग के प्राथमिक एवं उच्च प्राथमिक विद्यालयों में शासन ने परीक्षा का चार्ट बनाकर प्रत्येक जनपद के बेसिक शिक्षा अधिकारी को भेज दिया था। आदेश दिए थे कि चार्ट के आधार पर ही परीक्षाओं की तैयारी पूरी की जानी है। यदि किसी अधिकारी ने इसमें लापरवाही की तो संबंधित अधिकारियों पर कठोर कार्रवाई की जाएगी। अधिकारी शासन से आए चार्ट को लेकर बैठे हुए हैं, लेकिन शासन से बजट न आने के कारण सारा कार्य अधर में लटका हुआ है। दो-तीन दिन बजट और लेट हो गया तो परीक्षा कराने के लिए विभाग के सामने समस्या खड़ी हो जाएगी। विभाग के सामने फिर एक ही विकल्प बचेगा। जिसमें प्रश्नों को ब्लैक बोर्ड पर उतारा जाएगा और छात्र-छात्राएं कापी के पेज पर उनके उत्तर लिखेंगे, जबकि शासन से इस पर रोक लगा रखी है। बजट न होने के कारण बेसिक शिक्षा विभाग को यही कराना पड़ेगा।

