कजगांव के 159 पुराने कजली मेला में उमड़ी भीड़
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जौनपुर। विकस खण्ड सिरकोनी क्षेत्र के कजगांव व राजेपुर के कजरी का 159 वर्ष पुराना ऐतिहासिक मेले में शनिवार को भारी उमड़ी रही। एक अनुमान के अनुसार 50 हजार लोग पोखरे के दोनों ओर मेला देखने जुटे थे। दशकों से अपने तहर के अनोखे इस मेले में कजली का मुकाबला या कजली गायकों का जमघट दिखाई नही दिया बल्कि अश्लीलता में प्रेम का भाव लिये इसमें जीजा, साला, साली, दुल्हन, दुल्हा जैसे रिश्ते को लेकर गाली- गलौज और अश्लील हरकतों से विदाई करने की बात दोहराई गयी और दूल्हा तथा दुल्हन कुवांरे लौट गय। गाजे बाजे के साथ दोनों पड़ोसी गांव राजेपुर के एतिहासिक पोखरे के दो छोर पर हाथी, ऊंट,घोड़ा, गदहापर सवार बैंण्डबाजे और आतिशबाजी के साथ अपने ही गांव घर की महिलाओं के समक्ष गालियां व अश्लील हाव भाव का प्रदर्शन प्रदर्शन करते रहे। इस मेले में अश्लीलता के समावेश में कजगांव व राजेपुर गांव का प्रेम सौहार्द आपसी भाईचारा का गहरा संबंध है जिससे सिर्फ प्यार और मुहब्बत का पैगाम का संदेश मिलता है यही कारण है कि दोनों गांव के लोग अश्लील शब्दों में अश्लील हरकतों का बौछार के बावजूद आपस में प्रेम और भाईचारा का पैगाम दिया। ज्ञात हो किऐतिहासिक पोखरे में बहुत वर्षो पूर्व कजगांव की कुछ बालिकायें जरई धोने गई थी उसी समय राजेपुर गांव की कुछ बालिकायें वहां पहूचती है और दोनों पक्षों में कजरी लोकगीत का दंगल शुरू हो गया जो दिन और रात तक चलता रहा इससे प्रसन्न होकर जद्दू साव ने कजगांव की बालिकाओं का आदर सम्मान करते हुए वस्त्राभूषण से सुसज्जित कर उनकी विदाई किया तभी से इस मेले का शुभारम्भ हुआ जो आज भी जारी है दोनों गांव के दुल्हे एक दुसरे गांव के बारातियों से दुल्हन की मंाग करते हुए प्रत्येक वर्ष की तरह इस वर्ष भी कुंवारें ही लौट गये। मेले में पुलिस की पर्याप्त व्यवस्था की गयी थी।

