जन्माष्टमी की झांकियां देती है अलौकिक संदेश

  जौनपुर । श्री कृष्ण जन्माष्टमी भगवान श्री कृष्ण का जन्मोत्सव है। पुराणों के मुताबिक भगवान श्री कृष्ण ने भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को अवतार लिया था। मान्यतानुसार करीब 5 हजार 243 वर्ष पूर्व भगवान श्री कृष्ण के  मध्य रात्रि में इस धरती पर हुए अवतरण की तिथि को पर्व के रूप में भारत ही नहीं बल्कि विदेश में भी हिंदू संप्रदाय के लोग पूरी आस्था के साथ मनाते हैं। नगर के  माँ शारदा (मैहर वाली) शक्तिपीठ परिसर में इस बार यह पर्व तीन दिन तक मनाया जायेगा। शक्तिपीठ के प्रधान न्यासी सूर्य प्रकाश जायसवाल ने बताया है कि भगवान श्री विष्णु के दशावतारों में सर्वप्रमुख पूर्णावतार सोलह कलाओं से परिपूर्ण भगवान श्रीकृष्ण का माना जाता है जो द्वापर के अंत में हुआ। शास्त्रों में बताया गया है कि श्री कृष्ण का जन्म भाद्रपद की अष्टमी तिथि को रोहिणी नक्षत्र में हुआ था, लेकिन इस बार ऐसा नहीं हो पा रहा है। जिसके कारण यह पर्व तीन दिनों तक मनाया जाएगा। गृहस्थजन (स्मार्त) भगवान श्रीकृष्ण जन्माष्टमी 14 अगस्त को मनाएंगे। गोकुलाष्टमी 15 अगस्त को मनाई जाएगी।  वैष्णवजन श्रीकृष्ण जन्म व्रत 16 अगस्त को करेंगे। रोहिणी नक्षत्र 15-16 अगस्त की रात 1.27 बजे लग रहा है जो 16 को रात 11.50 बजे तक रहेगा। मंदिर को तीन दिवसीय उत्सव के लिए भव्य और आकर्षक ढंग से सजाया गया है भगवान श्री कृष्ण की अलौकिक लीला से जुड़ी कहानियों की श्रद्धालुओं के समक्ष जीवंत प्रस्तुति के लिए विद्युत चालित झांकियाँ सजायी गयी हैं। योगेश्वर श्री कृष्ण के भगवद् गीता के उपदेश अनादि काल से जनमानस के लिए जीवन दर्शन प्रस्तुत करते रहे हैं। उनका व्यक्तित्व और कृतित्व ही नहीं उनका सब कुछ, यहां तक कि उनके स्वरूप में शामिल सामान्य चीजें भी असाधारण संदेश देती हैं। कमल से पवित्रता, बाँसुरी से मीठे बोल,वैजयंती माला से स्थिरता एवं सदैव प्रसन्न भाव का तथा मोर पंख से निश्छल प्रेम का संदेश मिलता है इसलिए श्री कृष्ण जन्माष्टमी की झाँकियाँ भी आध्यात्मिक महत्व रखती हैं।

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