मच्छर उन्मूलन के लिए योजना विहीन स्वास्थ्य विभाग
https://www.shirazehind.com/2017/08/blog-post_772.html
जौनपुर। मच्छर जनित बीमारियां पूरे जिले में इस समय फैल रही हैं। सरकारी व प्राइवेट अस्पतालों में मरीजों की भीड़ लगी हुई है। इसके बावजूद भी मच्छरों से पैदा होने वाली इन बीमारियों के लिए स्वास्थ्य विभाग द्वारा अभी तक कोई उपाय नहीं किए गए। मलेरिया विभाग अभी तक सोया हुआ है। उनकी गतिविधि कहीं भी दिखाई नहीं देती है। अगर यह कहा जाए कि मच्छर उन्मूलन के लिए स्वास्थ्य विभाग पर कोई योजना नहीं है तो गलत नहीं होगा। दवा का छिड़काव न किए जाने से अनेक स्थानों पर मलेरिया बढ़ रहा है। इस समय समूचा जिला मच्छरों के हमलों से परेशान है। लोग मलेरिया बुखार से पीड़ित हैं। इसके बाद भी विभाग द्वारा मच्छरों से निजात दिलाने के प्रबंध नहीं किए गए। गौर करने की बात तो यह है कि जिला अस्पताल के डाक्टर लोगों को स्वच्छ स्थान पर रहने की सलाह तो देते हैं, जबकि जिला अस्पताल के आस पास अथाह गंदा जल व गंदगी के अंबार देखे जा सकते हैं। इन बीमारियों का खतरा बरकरार है। इस समय जबकि जिले में कालाजार, डेंगू, मलेरिया जैसी मौसमी बीमारियों का खतरा बना हुआ है। मच्छरों की मार से हर आम आदमी कराह रहा है। लोग मलेरिया बुखार की चपेट में आ रहे हैं। बावजूद इसके जिले में मच्छर नाशक दवा का छिड़काव व नालियों में दवा के साथ केरोसिन का छिड़काव भी नहीं किया जा रहा है। मच्छरों से आम जनता को बचाने के लिए नगर पालिका भी सक्रिय नहीं है। जलभराव वाले इलाकों में न मच्छररोधी दवा का छिड़काव कराया गया और न नालियों में केरोसिन या डीजल मिश्रित दवा डाली गई। इतना ही नहीं मलेरिया से बचने के लिए फागिग भी नहीं कराई जा रही है। चिकित्सकों का कहना है कि मच्छरों से बचना ही बीमारियों का सबसे बड़ा उपचार है। लोगों को घर के दरवाजे व खिड़की डबलडोर लगवानी चाहिए। कूलर के पानी को निकाल कर उसे साफ कर देना चाहिए। घर के आसपास गंदा पानी नहीं रहने देना चाहिए। घर के पास गंदगी भी नहीं रहनी चाहिए। मच्छरनाशक दवाओं व क्वाइल का भी प्रयोग करना चाहिए। मलेरिया का मच्छर साफ पानी में अंडे देता है। इससे पानी कहीं भी एकत्र नहीं रखना चाहिए। मच्छरों से मलेरिया, चिकनगुनिया, डेंगू, इन्सेफेलाइटिस कालाजार जैसी बीमारियां फैलती हैं।

