ईट भट्ठों पर खुलेआम हो रहा बालश्रम
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जौनपुर। सरकार बच्चों के उत्थान के लिए कितने ही जतन कर ले, लेकिन श्रम विभाग की लापरवाही से आज भी बच्चे पढ़ाई-लिखाई छोड़ कर बालश्रम कर रहे हैं। साक्षरता के लिए सरकार बहुत बड़ा बजट प्रति वर्ष खर्च करती है, लेकिन अधिकारियों की उदासीनता के कारण आज भी हजारों बच्चे शिक्षा से महरूम हो कर आज भी बाल श्रम कर रहे है। जिले के सभी ईट भट्टों पर काम करने वाले लोग अपने परिवार के साथ उन्ही भट्टों पर रहने लगते है। वहां पर वे अपने बच्चों की पढ़ाई लिखाई सब बंद करके उन्हें भी काम पर लगा लेते है। बरईपार गांव के एक भट्टे पर काम करने वाले एक व्यक्ति ने बताया कि वह भट्टे पर काम करने के लिए कई महीने पहले से अपने घर से भट्टे पर रहने के लिए आ जाते है। अब ऐसे में वह अपने बच्चों की पढ़ाई करे तो कैसे। उनके बच्चे भी उनके काम में हाथ बंटाते हैं। तब जाकर उनके साल भर के खाने का काम चल पाता है। वह भट्टे पर काम करने के लिए भट्टे के मालिक से हजारों रुपए पेशगी के भी लेते है। जिससे वह अपना कर्ज आदि उतारकर भट्टे पर काम करने के लिए आ जाते है। भट्टे पर ईट बनाने का काम वह ठेके पर करते है। बच्चे उनके काम में हाथ बटाकर उनका काम आसान करते है।ऐसे में हम अपने बच्चों की पढ़ाई के बारे में सोचे या फिर अपना कर्ज उतारने के बारे में सोचे। तमाम ईट भट्टों पर इसी तरह के परिवार अपना जीवन यापन करने के लिए बच्चों की पढ़ाई लिखाई छोड़कर लगे हुए हैं। श्रम विभाग होटलों, ईट भटठों पर बालश्रम को लेकर गंभीर नहीं । आरोप है कि विभाग के लोग भ्टठा मालिकों से कार्यवाही न करने के एवज में जेब भरते है।

