समर्थन मूल्य पर आलू का आकार बनेगा रोड़ा
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जौनपुर। बजट में किसानों को विशेष महत्व दिए जाने से किसान उत्साहित हैं। जिले में 35 हजार से अधिक आलू किसान भी अच्छे दिन आने की उम्मीद लगाए हुए हैं, लेकिन सबसे बड़ा पेंच आलू के आकार पर फंसा हुआ है। किसानों का कहना है कि सरकार द्वारा आलू खरीद में आलू का साइज तय करने से आलू बेचने में दिक्कत होती है। अगर सरकार को आलू किसानों को राहत देनी है तो मानक में बदलाव करना होगा। केंद्र सरकार ने आलू किसानों को राहत देने के लिए आपरेशन ग्रीन शुरू किया है। इसमें आलू का समर्थन मूल्य बढ़ाया जाएगा, लेकिन पिछले साल की तरह आलू का साइज खरीद में सबसे बड़ा रोड़ा बनेगा। सरकार ने समर्थन मूल्य में आलू खरीद करने के लिए एक विशेष प्रकार का आलू का चयन किया जाता है। इसमें आलू का साइज कम से कम 35 एम एम और अधिक 150 एम एम का साइज तय किया जाता है। किसानों का मानना है कि खेत में आलू खुदाई के समय इस साइज का आलू 40 प्रतिशत ही निकलता है। ऐसे में बाकी बचे 60 प्रतिशत आलू का क्या होगा। साथ ही किसानों के पास खेत में साइज मापने का साधन नहीं होना भी परेशानी पैदा करता है। सरकार को समर्थन मूल्य के साथ खरीद के मानक में भी बदलाव करने चाहिए। आलू का खुदाई शुरू होने वाली है। खेत से ही आलू बिक्री कर देते है या फिर कोल्ड स्टोर में भेज देते हैं। सरकारी क्रय केंद्र पर भेजने के लिए निश्चित साइज का आलू अलग करना होगा। इससे किसान का खर्च बढ़ जाएगा और अवशेष आलू का भाव भी नहीं मिलेगा। फरवरी महीने में ही लगभग 70 प्रतिशत आलू की खोदाई हो जानी है। आलू खुदाई के बाद उसे जल्द से जल्द कोल्ड स्टोर में रख दिया जाता है। अगर सरकार समर्थन मूल्य बढ़ाने के साथ साइज का मानक नहीं कम करेगी तो सरकार को आलू देने में नुकसान होगा।

