अपनी संस्कृति को सहेजने में जुटा है यह कलाकार
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जौनपुर। कुछ वर्षो परम्परागत फागुन गीत विलुप्त होता जा रहा है। उसके स्थान पर अश्लील गीतो ने अपना स्थान बना लिया है। अपनी पुरानी गीतो को पुनः स्थान दिलाने के लिए जिले कुछ कलाकारो ने वीणा उठा है। युवा गायक आशीष पाठक ने शहर से लेकर गांव तक अपनी मण्डली के साथ होली की गीत गा रहे है। अपनी पुरानी गीत संगीत को सुनने वालो की भीड़ उमड़ पड़ी। सभी को ऐसा लगा कि एक बार फिर से हम लोग 80 के दशक में पहुंच गये है।
नगर गोमती के पावन तट पर अपने आवाज का जादू विखेर रहा यह गायक आशीष पाठक है। आशीष वैसे तो भोजपुरी देवी गीत गायक के नाम से चर्चित है। लेकिन कुछ वर्षो से हमारी संस्कृति पर तेजी से हावी हो रही पाश्चात संस्कृति ने इन्हे अपने पुराने गीतो को सहेजने को मजबूर कर दिया है। ये होली त्योहार में गाये जाने वाले पुराने गानो का कलेक्सन करके उसे शहर से लेकर देहात अपनी सुसुली आवाज से विखेर रहे है। इनका मक्सद पैसा कमाना नही बल्की अपनी पुरानी संस्कृति को सहेजना है।
आशीष पाठक गायक
नगर गोमती के पावन तट पर अपने आवाज का जादू विखेर रहा यह गायक आशीष पाठक है। आशीष वैसे तो भोजपुरी देवी गीत गायक के नाम से चर्चित है। लेकिन कुछ वर्षो से हमारी संस्कृति पर तेजी से हावी हो रही पाश्चात संस्कृति ने इन्हे अपने पुराने गीतो को सहेजने को मजबूर कर दिया है। ये होली त्योहार में गाये जाने वाले पुराने गानो का कलेक्सन करके उसे शहर से लेकर देहात अपनी सुसुली आवाज से विखेर रहे है। इनका मक्सद पैसा कमाना नही बल्की अपनी पुरानी संस्कृति को सहेजना है।
आशीष पाठक गायक

