जौनपुर के खेतो में लहलहाने लगी है केशर की फसल
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जौनपुर। मूली मक्का के लिए महफूज खेतो में कश्मीर की पहचान बनी केसर की फसल लहलहाने लगी है। पठखौली गांव के किसान अनुज कुमार पाठक ने अपने कठिन परिश्रम
और लगन की बदौलत यह संभव हो सका है। विनय ने डेढ़ एकड़ खेत में केसर की
खेती की है। फसल में फूल आ गए हैं। मार्च के अंतिम सप्ताह तक फसल कट
जाएगी। सब कुछ सही सलामत रहा तो यह फसल किसान को मालामाल कर देगी।
परम्परागत खेती में लगातार घाटा सहते चले आ रहे किसानो के लिए एक अच्छी खबर है। अब वो भी नई फसलों की खेती को अपनाकर मालामाल हो सकते है। इसकी मिशाल बनने जा रहे है पठखौली गांव निवासी अनुज कुमार पाठक। अनुज ने अपनी मेहनत के बदौलत मक्का गेहूं और धान की फसलों के स्थान पर आज केशर की फसल लहलहा रही है। अनुज एक कम्पनी में अधिकारी है इसके बाद भी उन्होंने ने खेती किसानी नहीं छोड़ी है। उन्होंने बताया कि उन्हें 28 दिन ड्यूटी करनी होती है और 28 दिन छुट्टी मिलती है। वह छुट्टी के दिनों में खेती बारी में ही बिताते हैं। व्यवसायिक खेती के लिए वह इंटरनेट पर तलाश कर रहे थे। तभी उन्हें महाराष्ट्र के जलगांव के किसान बालू गूजर का नंबर मिला। बालू ने केसर की खेती की थी। वह उनसे मिलने जलगांव चले गए। खेती के बारे में जानकारी की और उसी किसान के माध्यम से लक्ष्मी एग्रो कंपनी से 1.80 लाख रुपये में तीन सौ ग्राम केसर के बीज ले आए। परिवार वाले भी उन्हें ऐसा रिस्क लेने से मना कर रहे थे बावजूद इसके वह अपनी जिद पर अड़े रहे और 20 अक्टूबर को इसकी डेढ़ एकड़ खेत में केसर की बुवाई की। करीब इतने ही खेत में अपने रिश्तेदार खानपुर गाजीपुर में बुवाई कराई है। खेत में लहलहा रही केसर की फसल में फूल आ गए हैं। मार्च के आखिरी सप्ताह तक फसल कटने लायक हो जाएगी। अनुज ने जिस अमेरिकन केसर की खेती की है उसकी बाजार में कीमत 90 हजार रुपये किलो है।
परम्परागत खेती में लगातार घाटा सहते चले आ रहे किसानो के लिए एक अच्छी खबर है। अब वो भी नई फसलों की खेती को अपनाकर मालामाल हो सकते है। इसकी मिशाल बनने जा रहे है पठखौली गांव निवासी अनुज कुमार पाठक। अनुज ने अपनी मेहनत के बदौलत मक्का गेहूं और धान की फसलों के स्थान पर आज केशर की फसल लहलहा रही है। अनुज एक कम्पनी में अधिकारी है इसके बाद भी उन्होंने ने खेती किसानी नहीं छोड़ी है। उन्होंने बताया कि उन्हें 28 दिन ड्यूटी करनी होती है और 28 दिन छुट्टी मिलती है। वह छुट्टी के दिनों में खेती बारी में ही बिताते हैं। व्यवसायिक खेती के लिए वह इंटरनेट पर तलाश कर रहे थे। तभी उन्हें महाराष्ट्र के जलगांव के किसान बालू गूजर का नंबर मिला। बालू ने केसर की खेती की थी। वह उनसे मिलने जलगांव चले गए। खेती के बारे में जानकारी की और उसी किसान के माध्यम से लक्ष्मी एग्रो कंपनी से 1.80 लाख रुपये में तीन सौ ग्राम केसर के बीज ले आए। परिवार वाले भी उन्हें ऐसा रिस्क लेने से मना कर रहे थे बावजूद इसके वह अपनी जिद पर अड़े रहे और 20 अक्टूबर को इसकी डेढ़ एकड़ खेत में केसर की बुवाई की। करीब इतने ही खेत में अपने रिश्तेदार खानपुर गाजीपुर में बुवाई कराई है। खेत में लहलहा रही केसर की फसल में फूल आ गए हैं। मार्च के आखिरी सप्ताह तक फसल कटने लायक हो जाएगी। अनुज ने जिस अमेरिकन केसर की खेती की है उसकी बाजार में कीमत 90 हजार रुपये किलो है।

