खेतों से सड़क तक छुटटा पशुओं का आतंक
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जौनपुर । कड़ी मेहनत और भारी-भरकम पूंजी लगाकर धान और मक्का की अच्छी उपज की आस लगाए किसान की राह में एक बड़ी मुसीबत छुट्टा पशु हैं। बड़े-बड़े झुंड में घूम रहे सांड़ का आतंक ऐसा है कि जिस खेत में इनका झुंड उतरा वहां फसल पूरा चट करके ही छोड़ता है। पेट भरने के बाद इन आवारा पशुओं का बेखौफ झुंड सड़कों पर अपना आतंक फैला रहा है। आलम यह है कि अब शहर के बीच सड़क पर खड़ा झुंड भारी वाहनों के तेज हार्न से भी नहीं हटता है। शहर के विभिन्न मार्ग पर घूमते छुट्टा सांड़ों के आतंक को कभी भी देखा जा सकता है। अनेक झुंड गांवों में किसानों के धान और मक्का और सब्जियों की फसल चर जा रहे हैं। बताते है कि शहर में छुट्टा सांड़ों की संख्या एक हजार से अधिक है। बताते हैं कि इन पशुओं का ऐसा स्वभाव है कि ये जिस खेत में एक दिन चरते हैं उसी में तब तक चरते हैं जब तक पूरा खेत चट नहीं कर जाते हैं। दिन में छुट्टा पशुओं का झुंड शहर में विचरण करता है जो छोटे बच्चों तथा दोपहिया वाहनों के लिए किसी दिन बड़ी दुर्घटना का कारण बन सकता है। आवारा पशुओ के डर से गांवो में एक दशक पूर्व तक आलू ,गोभी , पालक , टमाटर ,बैगन आदि की खेती बहुतायत से होती थी। नीलगायों और जंगली सुअर से हो रहे नुकशान के चलते सब्जी की खेती अब बहुत कम किसान ही करते हैं। छुट्टा सांड़ों का झुंड अब किसानों के धान ,गन्ना ,गेंहू ,सरसो की फसल को भारी नुकसान पहुंचा रहा है। छुट्टा पशुओं से किसानों को हो रहे नुकसान से बचाव के लिए कई बार जिला प्रशासन से मांग किया गया किन्तु सरकारी स्तर पर समस्या नजरंदाज कर दी गई। जब उक्त साढ़ आपस में लड़ते हैं तो कोई भी इनकी चपेट में आकर चोटिल हो सकता है।

