दो एस ओ समेत आठ प्रताड़ना और छेड़खानी के आरोपियों को कोर्ट ने किया तलब
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जौनपुर। बरसठी थाना क्षेत्र के दतांव गांव निवासी राजेश के घर चढ़कर पुलिस
द्वारा तांडव मचाने, महिला से छेड़खानी करने के मामले में सीजेएम ने
थानाध्यक्ष नेवढि़या समेत छह आरोपियों को घर में घुसकर मारने -पीटने
गालियां व धमकी देने के आरोप में तथा थानाध्यक्ष बरसठी व एस आई को उपरोक्त
के अलावा छेड़खानी के मामले में भी प्रथम दृष्टया आरोपी पाते हुए 25 सितंबर
को कोर्ट में तलब किया है। हाईकोर्ट के आदेश के बाद सीजेएम ने यहां रहे
पुलिस अधीक्षक के के चौधरी, डिप्टी एसपी संजय राय व दो थानाध्यक्षों समेत
दस के खिलाफ विभिन्न धाराओं में वाद दर्ज किया था। बाद में मामला बतौर
परिवाद दर्ज हुआ। गवाहों के बयान के आधार पर आठ आरोपियों पर प्रथम दृष्टया
मामला पाया गया।
राजेश दुबे ने कोर्ट में अधिवक्ता सुधीर श्रीवास्तव के जरिए दरख्वास्त दी कि 14 जनवरी 2018 को थानाध्यक्ष बरसठी सात-आठ पुलिसकर्मियों के साथ उसके घर में घुसकर पत्नी से अभद्रता किए। उसने उच्चाधिकारियों को शिकायती प्रार्थना पत्र दिया। इससे नाराज नाराज होकर 21 जनवरी को 3 बजे थानाध्यक्ष बरसठी, थानाध्यक्ष नेवढि़या 40-50 पुलिसकर्मियों के साथ आए और कहा कि पुलिस अधीक्षक व डिप्टी एसपी का आदेश है कि तुम्हारा नवनिर्मित बारजा तोड़ दिया जाए जबकि कोर्ट का ऐसा कोई आदेश नहीं था। वादी द्वारा लिखित आदेश मांगने पर वे नाराज हो गए। पड़ोसी से ईट पत्थर चलवाए। एक पत्रकार मौके पर पहुंचा। उसके आश्वासन पर वादी छत से उतरकर नीचे आया तब पुलिस वाले उसे पकड़ कर थाने ले गए, बुरी तरह मारे पीटे। रात में पुन: पुलिसवाले घर पर चढ़कर घर का बारजा तोड़ दिए पत्नी से मारपीट व छेड़खानी किए। वादी व उसके पड़ोसी का चालान कर दिए। वादी एसपी के आवास पर जाकर आपबीती बताया तो वह गालियां, धमकी देते हुए डांट कर भगा दिए। वादी ने मुख्यमंत्री व डीजीपी को दरख्वास्त दी। सुनवाई न होने पर कोर्ट में दरख्वास्त दी। कोर्ट द्वारा वादी की दरख्वास्त निरस्त कर दी गई। तब उसने हाईकोर्ट में याचिका दायर की। हाईकोर्ट ने मामले में संज्ञान लेते हुए निचली अदालत को दिशा निर्देश जारी किया। अंतत: वादी व गवाहों के बयान के बाद आरोपियों के खिलाफ कोर्ट ने मामला पाते हुए तलब किया।
राजेश दुबे ने कोर्ट में अधिवक्ता सुधीर श्रीवास्तव के जरिए दरख्वास्त दी कि 14 जनवरी 2018 को थानाध्यक्ष बरसठी सात-आठ पुलिसकर्मियों के साथ उसके घर में घुसकर पत्नी से अभद्रता किए। उसने उच्चाधिकारियों को शिकायती प्रार्थना पत्र दिया। इससे नाराज नाराज होकर 21 जनवरी को 3 बजे थानाध्यक्ष बरसठी, थानाध्यक्ष नेवढि़या 40-50 पुलिसकर्मियों के साथ आए और कहा कि पुलिस अधीक्षक व डिप्टी एसपी का आदेश है कि तुम्हारा नवनिर्मित बारजा तोड़ दिया जाए जबकि कोर्ट का ऐसा कोई आदेश नहीं था। वादी द्वारा लिखित आदेश मांगने पर वे नाराज हो गए। पड़ोसी से ईट पत्थर चलवाए। एक पत्रकार मौके पर पहुंचा। उसके आश्वासन पर वादी छत से उतरकर नीचे आया तब पुलिस वाले उसे पकड़ कर थाने ले गए, बुरी तरह मारे पीटे। रात में पुन: पुलिसवाले घर पर चढ़कर घर का बारजा तोड़ दिए पत्नी से मारपीट व छेड़खानी किए। वादी व उसके पड़ोसी का चालान कर दिए। वादी एसपी के आवास पर जाकर आपबीती बताया तो वह गालियां, धमकी देते हुए डांट कर भगा दिए। वादी ने मुख्यमंत्री व डीजीपी को दरख्वास्त दी। सुनवाई न होने पर कोर्ट में दरख्वास्त दी। कोर्ट द्वारा वादी की दरख्वास्त निरस्त कर दी गई। तब उसने हाईकोर्ट में याचिका दायर की। हाईकोर्ट ने मामले में संज्ञान लेते हुए निचली अदालत को दिशा निर्देश जारी किया। अंतत: वादी व गवाहों के बयान के बाद आरोपियों के खिलाफ कोर्ट ने मामला पाते हुए तलब किया।

