तीन दिवसीययोग प्रशिक्षण शिविर का शुभारंभ

 जौनपुर। बालिकाएं किसी भी राष्ट्र की सामाजिक और सांस्कृतिक विरासत को एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी को हस्तान्तरित करने की सबसे सशक्त माध्यम होती हैं इसलिए बचपन से ही बेटियों को योग की संस्कारशाला में संस्कारित करके न केवल इनको शारीरिक और मानसिक रूप से स्वस्थ और खुशहाल रखा जा सकता है बल्कि इनके भीतर सन्निहित अन्तर्शक्तियो का विकास करके इनके कौशल को निखारा जा सकता है। उपरोक्त बातें कस्तूरबा गाँधी आवासीय बालिका विद्यालय धर्मापुर में आयोजित हो रहे तीन दिवसीय विशेष ध्यान योग प्रशिक्षण शिविर के शुभारंभ पर खण्ड शिक्षा अधिकारी श्रीमती सुधा वर्मा नें कही। योग के क्रियात्मक और सैद्धांतिक पक्षों का प्रशिक्षण देते हुए योग प्रशिक्षक अचल हरीमूर्ति के द्वारा बताया गया कि आज के भागम-भाग जीवन शैली में योगाभ्यास को सम्मिलित करके छोटी बड़ी समस्याओं से खूद को बचाया जा सकता है इसीलिए बच्चों में शैक्षणिक कुशलता लानें के लिए बचपन से ही ध्यान और प्राणायामों का अभ्यास आवश्यक होता है। क्रियात्मक अभ्यासों के क्रम में बालिकाओं को विविध प्रकार के आसन,व्यायाम व प्राणायामों सहित ध्यान का अभ्यास कराया जा रहा है जिसमें योगिग-जागिंग,सूर्यनमस्कार, ताड़ासन,त्रिकोणासन,बीरभद्रासन,वृक्षासन, मर्कटासनों सहित भस्त्रिका,कपालभाति,अनुलोम-विलोम,वाह्य प्राणायाम व भ्रामरी तथा उद्गीथ प्राणायामों के साथ अग्निसार और नौलिक्रिया सहित ध्यान की विविध गतिविधियों का अभ्यास कराया जा रहा है। इस मौके पर वार्डन शशि श्रीवास्तव,सीता सिंह,रीना यादव,एरम जाफरी व विनय यादव सहित अन्य लोग उपस्थित रहे।

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