मन के मैल को मिटाकर अन्तरात्मा को स्वच्छ करने की आवश्यकता है : दीदी मनोरमा
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मुंगराबादशाहपुर ( जौनपुर ) ।यदि मन स्वच्छ होगा तो स्वच्छ मन से किया गया हर कार्य महान होता है ।
स्वच्छ मन से किए गए व्यापार से स्वच्छ एवं शुद्ध धन की प्राप्ति होती है
इस धन से स्वच्छ अन्न मिलता है और स्वच्छ अन्न के सेवन से मन भी स्वच्छ हो
जाता है और जब मन स्वच्छ हो जाता है तो हम किसी का कोई अहित नही के सकते
इसी लिए स्वच्छ मन से किया गया हर कार्य महान होता है । उक्त बातें
प्रजापति ब्रह्मकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय द्वारा चलाए जा रहे ओम शान्ति
के स्थानीय नगर के स्टेशन रोड स्थित सेन्टर पर शनिवार की देर शाम आयोजित
स्नेह मिलन कार्यक्रम को मुख्य वक्ता के रूप में संबोधित करते हुए उत्तर
प्रदेश जोन की प्रभारी दीदी मनोरमा ने कही । दीदी ने कहा कि जब किसी का मन
स्वच्छ हो जाता है तो उसे परम् पिता परमात्मा की निकटता प्राप्त हो जाती है
वह चाह कर भी किसी का अहित नही के पाता क्योंकि स्वच्छ मन मे परम् पिता
परमात्मा का निवास होता है और परम् पिता कभी भी अपने किसी बन्दे से कोई
अहित का कार्य नही करने देता है । उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि जिस
प्रकार किसी नदी के जल के किनारे बैठ जाने मात्र से हमे शीतलता का अनुभव
प्राप्त होता है उसी प्रकार यदि इस सांसारिक जीवन से कुछ पल परम् पिता
परमात्मा के लिए निकाल सके तो हम अपने मानव जीवन को सफल बना सकते है ।
कार्यक्रम में उपस्थित दीदी श्रद्धा ने राजयोग व मनोयोग पर विस्तार से
प्रकाश डालते हुए उपस्थित लोगों से राजयोग का अभ्यास कराया और नियमित
राजयोग करके अपने इस मानव जीवन को सफल बनाने के लिए प्रेरित किया । अन्त
में ओम शान्ति के स्थानीय सेन्टर की संचालिका दीदी अनीता ने स्नेह मिलन
कार्यक्रम में आए हुए सभी अतिथियों के प्रति आभार ज्ञापित किया । इस मौके
पर अनिल यादव , श्याम कुमार केशरवानी , अवध नारायण तिवारी एडवोकेट , राज
मणि यादव , पी एन सरोज अंजू यादव सहित बड़ी संख्या में लोग उपस्थित रहे ।

