हवन और कन्या पूजन के साथ नवरात्र का समापन
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जौनपुर। जिले भर में हवन तथा कन्या पूजन के साथ शारदीय नवरात्रि. का गुरूवार को समापन हो गया। पूरे दिन घरों तथा एक हजार से अधिक बनाये गये पूजा पण्डालों में हवन पूजन होता रहा और स्वाहा स्वाहा का मंत्र गुंजायमान रहा। यज्ञ के पवित्र तथा रोग नाशक धुयें से शहर का वातावरण शुद्ध हो गया। नवरात्र व्रत रखने वालों ने पारण किया । ज्ञात हो कि नवरात्र हिन्दुओं का धार्मिक पर्व है। इसमें विशेष रूप से आदि शक्ति दुर्गा की पूजा की जाती है। यह पर्व पूरे नौ दिनों तक मनाया जाता है जिस दौरान देवी के नौ रूपों की पूजा की जाती है। नवरात्र के अंतिम दिन विधि- पूर्वक कन्या पूजन करना भी अति आवश्यक माना गया है , भविष्यपुराण और देवीभागवत पुराण के अनुसार नवरात्र पर्व के अंत में कन्या पूजन जरूरी माना गया है। कन्या पूजन के बिना नवरात्र व्रत को अधूरा माना जाता है। कन्या पूजन अष्टमी या नवमी में से किसी एक दिन करना श्रेष्ठ माना जाता है। कन्या पूजन के लिए दस वर्ष तक की नौ कन्याओं की आवश्यकता होती है। इन नौ कन्याओं की लोग को मां दुर्गा के नौ रूप समझकर ही पूजा करनी चाहिए। कन्या पूजन के लिए सबसे पहले व्यक्ति तो प्रातः स्नान कर विभिन्न प्रकार का भोजन पूरी ,हलवा, खीर, भुना हुआ चना आदि तैयार कर सभी प्रकार के भोजन में से पहले मां दुर्गा को भोग लगाना चाहिए। भोजन करना से पहले कन्याओं का पैर शुद्ध पानी से धोकर उन्हें भोजन के लिए साफ स्थान पर कपड़ा बिछाकर कर उनके हाथों में रक्षा सूत्र बांधकर माथे पर रोली का टीका लगाया जाता है मां दुर्गा को जिस भोजन का भोग लगाया हो उसे सर्वप्रथम प्रसाद के रूप में कन्याओं को खिलाया जाता है। जब कन्या पेट भर के भोजन कर ले तो उन्हें दक्षिणा में रुपया, सुहाग की वस्तुएं, चुनरी आदि वस्तुएं उपहार दिया जात है। अंत में कन्याओं के पैर छूकर उनसे आशीर्वाद लेकर उन्हें प्रेम पूर्वक विदा करना चाहिए। इस दिन हवन करना बेहद आवश्यक होता है और कोशिश करनी चाहिए कि हवन की कुच आहुतियां कन्याओं के हाथों से डाली जाएं।

