सपा नेता समेत छह लोगो के खिलाफ धोखाधड़ी व जालसाजी का मुकदमा दर्ज करने का आदेश
https://www.shirazehind.com/2019/07/blog-post_785.html
जौनपुर। संपत्ति हड़पने की नीयत से नगर पालिका परिषद में फर्जी खतौनी
दाखिल कर संपत्ति का अकेला स्वामी प्रदर्शित करने के मामले में मुख्य
न्यायिक दंडाधिकारी (सीजेएम) ने समाजवादी पार्टी की नेता पूनम मौर्य समेत
छह आरोपितों के खिलाफ धोखाधड़ी व जालसाजी की प्राथमिकी दर्ज करने का आदेश
शहर कोतवाल को दिया है। पूनम मौर्य गत नगर निकाय चुनाव में सिटी बोर्ड
जौनपुर अध्यक्ष पद के लिए सपा की अधिकृत उम्मीदवार रहीं।
राम आसरे मौर्य निवासी मरदानपुर ने अधिवक्ता उपेंद्र विक्रम सिंह के माध्यम से कोर्ट में दफा 156 (3) के तहत प्रार्थना पत्र दिया। इसमें सपा नेता पूनम मौर्य, हरिओम, राम विलास, विजय, विक्रम व धन देवी को आरोपित किया गया है। प्रार्थना पत्र के मुताबिक पूनम मौर्य प्रभावशाली राजनीतिक महिला हैं। वह जालसाजी करके परिवार की संपत्ति पर कब्जा करने का प्रयास करती रहतीं हैं। उन्होंने अन्य आरोपितों संग मिलकर साजिश के तहत एक पेज की फर्जी खतौनी बनाकर व शपथ पत्र देकर सिटी बोर्ड में अपनी मां धन देवी के नाम से कर निर्धारण के लिए प्रस्तुत किया। खतौनी में पेज तीन में अंकित किए गए आदेश को मिटा दिया गया है। खतौनी दिनांक 5 सितंबर 2017 को जारी किया जाना प्रदर्शित था जबकि उक्त दिनांक पर ऐसी कोई खतौनी राजस्व अभिलेख में नहीं थी जिसमें केवल पूनम के पिता स्व. बाबूराम का नाम दर्ज रहा हो। आरोपितों ने संपत्ति को कब्जा करने के लिए कूटरचना कर फर्जी खतौनी तैयार की। खतौनी में कई आदेश भी दर्ज थे जिसमें आदेश दिनांक 20 नवंबर 2015 के अनुसार वादी के पिता गजराज, छविराज व भवानी प्रसाद का भी नाम दर्ज था। धन देवी द्वारा सिटी बोर्ड में प्रस्तुत प्रमाणित खतौनी में बाबूराम का नाम मृत खातेदार के रूप में दर्ज होने का उल्लेख है जबकि उक्त भूमि की अन्य खतौनी की प्रमाणित प्रतिलिपि में बाबूराम के साथ सुखराम व भवानी प्रसाद के नाम भी दर्ज होने का उल्लेख है। खतौनी में कूटरचना करके एकल स्वामित्व की प्रविष्टि प्रदर्शित किए जाने के कारण कोर्ट ने प्रथम दृष्टया गंभीर मामला होना पाया।
राम आसरे मौर्य निवासी मरदानपुर ने अधिवक्ता उपेंद्र विक्रम सिंह के माध्यम से कोर्ट में दफा 156 (3) के तहत प्रार्थना पत्र दिया। इसमें सपा नेता पूनम मौर्य, हरिओम, राम विलास, विजय, विक्रम व धन देवी को आरोपित किया गया है। प्रार्थना पत्र के मुताबिक पूनम मौर्य प्रभावशाली राजनीतिक महिला हैं। वह जालसाजी करके परिवार की संपत्ति पर कब्जा करने का प्रयास करती रहतीं हैं। उन्होंने अन्य आरोपितों संग मिलकर साजिश के तहत एक पेज की फर्जी खतौनी बनाकर व शपथ पत्र देकर सिटी बोर्ड में अपनी मां धन देवी के नाम से कर निर्धारण के लिए प्रस्तुत किया। खतौनी में पेज तीन में अंकित किए गए आदेश को मिटा दिया गया है। खतौनी दिनांक 5 सितंबर 2017 को जारी किया जाना प्रदर्शित था जबकि उक्त दिनांक पर ऐसी कोई खतौनी राजस्व अभिलेख में नहीं थी जिसमें केवल पूनम के पिता स्व. बाबूराम का नाम दर्ज रहा हो। आरोपितों ने संपत्ति को कब्जा करने के लिए कूटरचना कर फर्जी खतौनी तैयार की। खतौनी में कई आदेश भी दर्ज थे जिसमें आदेश दिनांक 20 नवंबर 2015 के अनुसार वादी के पिता गजराज, छविराज व भवानी प्रसाद का भी नाम दर्ज था। धन देवी द्वारा सिटी बोर्ड में प्रस्तुत प्रमाणित खतौनी में बाबूराम का नाम मृत खातेदार के रूप में दर्ज होने का उल्लेख है जबकि उक्त भूमि की अन्य खतौनी की प्रमाणित प्रतिलिपि में बाबूराम के साथ सुखराम व भवानी प्रसाद के नाम भी दर्ज होने का उल्लेख है। खतौनी में कूटरचना करके एकल स्वामित्व की प्रविष्टि प्रदर्शित किए जाने के कारण कोर्ट ने प्रथम दृष्टया गंभीर मामला होना पाया।
