अवैध कब्जे से मुक्त कराये जाने का प्रशासन का दावा हवा-हवाई

जौनपुर।  कानून की धज्जियां उड़ाते हुए भूमाफिया द्वारा तालाबों, भीटा, चरागाह तथा अन्य सार्वजनिक उपयोग की लोक संपत्तियों पर धड़ल्ले से कब्जा कर रहे हैं। प्रशासन इनके समक्ष असहाय हो चुका है ।तालाबों को अवैध कब्जे से मुक्त कराये जाने का दावा हवा-हवाई सिद्ध हो रहा है।
बता दें कि तालाबों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए राष्ट्रीय हरित ट्रिब्यूनल द्वारा नम भूमि अधिनियम जारी किया गया जिसके अनुसार नदियों तालाबों झीलों से 100 मीटर की दूरी तक भवन आदि का निर्माण अवैध हैं। भले ही वह में भूमधारी की जमीन क्यों ना हो ।लेकिन वास्तविकता ठीक इसके विपरीत है ।उदाहरण के रूप में जनपद मुख्यालय से मात्र 4 किमी दूर पर तहसील सदर स्थित ग्राम फूलपुर स्थित लट्ठाहरवा तालाब है इसकी भूखंड संख्या 452 है तालाब के भीटा का नंबर 451 है पुराना नंबर 130 एवम 218 भीटा को सन 1962 की चकबंदी के सामने बंजर दर्ज करके इसे चारागाह हेतु सुरक्षित कर दिया गया जबकि 1359 फसली में यह भीटा है ।आकार पत्र 4145 नया चारागाह हेतु सुरक्षित अंकित है। बाद में इस भूखंड को पट्टा कर दिया गया। नई चकबंदी में चकबंदी कर्ता की रिपोर्ट पर चकबंदी अधिकारी ने पट्टेदारों का नाम निरस्त कर दिया गया। इसके बाद भू -माफियाओं ने उप संचालक चकबंदी को रिश्वत देकर आदेश में लिखवा दिया की यह भूमि चरागाह की नहीं है इसी आधार पर चकबंदी अधिकारी ने पट्टेदारों का नाम दर्ज कर दिया इतना मौका मिलते ही मौके पर ग्राम प्रधान द्वारा कराए गए सुंदरीकरण
के कार्यों को ध्वस्त करा दिया तालाब के भीटों को नष्ट करके भवन निर्माण शुरू कर दिया। तालाब के भीटे की बिक्री भी हो रही है। एक विशेष तथ्य यह भी है कि इस संबंध में मुख्य राजस्व अधिकारी न्यायालय में भूमि प्रबंध समिति बनाम दिसंबर का मुकदमा 26-27 वर्षो से लंबित है। एक निगरानी जिला शासकीय अधिवक्ता ने उप संचालक चकबंदी के न्यायालय में सरकार बनाम कैलाश दाखिल की गई है परंतु उचित पैरवी न होने के कारण तालाब अतिक्रमण का शिकार हो गया। इसी प्रकार इसी से सटे गांव सहजनपुर गांव के सभी तालाब अतिक्रमण के कारण नष्ट प्राय हो रहे हैं। सिटी रेलवे स्टेशन से उत्तर तरफ स्थित विशाल तालाब पर चारों ओर से भू-माफिया कब्जा करते चले आ रहे हैं। नम भूमि अधिनियम के तहत कार्यवाही न हो पाने के कारण भू माफियाओं का मनोबल बढ़ा हुआ है। तालाबों व सार्वजनिक संपत्तियों के सुरक्षा के प्रति लापरवाह अधिकारियों कर्मचारियों को दंडित किए बगैर समस्या का निराकरण संभव नहीं है।

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