"मेरा गांव, मेरी जिम्मेदारी" का नाम इस समय सुर्खियों में
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जौनपुर। जौनपुर में "मेरा गांव, मेरी जिम्मेदारी" का नाम इस समय सुर्खियों में है। जब से इस कोविड-19 महामारी का प्रकोप भारत में आया है तभी से "मेरा गांव, मेरी जिम्मेदारी, की टीम कभी जागरूकता के पोस्टर ई रिक्शा ऑटो आदि पर लगाती है तो कभी लोगों को हैंड वॉश सैनिटाइजर और मास्क बांटते हुए नजर आती है वहीं जब से लाक डाउन चल रहा है ,मेरा गांव मेरी जिम्मेदारी के प्रणेता प्रदीप मिश्र अपने परिवार के साथ आवास से प्रतिदिन रात्रि के 50 लोगों का भोजन पूरी गुणवत्ता सफाई व स्वच्छता के साथ बनाकर थाना लाइन बाजार के माध्यम से जरूरतमंदों तक पहुंचा रहे हैं।
"मेरा गांव, मेरी जिम्मेदारी" द्वारा चलाए जा रहे "घर से सहयोग- रसोई" के अंतर्गत लाकँ डाउन के दौरान 50 पैकेट रात्रि भोजन प्रतिदिन थाना लाइन बाजार जौनपुर को ज़रुरतमंदो के लिए के लिए दिया जा रहा है। यह इसलिए संभव हो पा रहा है की "मेरा गांव, मेरे जिम्मेदारी" के सदस्य संजय श्रीवास्तव जी प्रकाश मिश्र के दिशा-निर्देश में मेरे घर के सभी सदस्य मम्मी, पूनम, नूतन प्रदीप्ति, कृति और सौम्या इस कार्यक्रम में बड़ी ही सेवा भाव से लगे हैं।
मेरा गांव मेरी जिम्मेदारी के प्रणेता प्रदीप मिश्र ने बताया कि मेरे इस कार्यक्रम में बहुत से लोग सहयोग देने के लिए आगे आ रहे हैं और मुझसे मेरा अकाउंट नंबर मांग रहे हैं। मैं उन सभी सदस्यों की भावनाओं का पूरी कद्र करता हूं और उनका आभार व धन्यवाद ज्ञापित करता हूं। लेकिन जैसा कि आप जानते हैं की हम 50 लोगों का भोजन घर के सभी सदस्यों की मदद से ही बना रहा हूं और मैं भोजन बनाने की मात्रा बढ़ा कर इन लोगों पर कोई दबाव नहीं डालना चाहता। सेवा वही अच्छी है जो मन व भाव से हो, किसी दबाव में नहीं। इस वजह से मैं अभी आप लोग का सहयोग नहीं ले पा रहा हूं। फिर भी जो लोग पहले से मेरा एकाउंट नंबर जानते थे सहयोग राशि भेज दी।
वहीं जब एक सुबह सब्जी लेने गया तो मेरे सब्जी वाले रामबचन मौर्य जी (स्टेट बैंक कचहरी के सामने) ने पूछा भैया इतनी सब्जी क्या करते हैं? तो मैंने उन्हें अपने कार्यक्रम "घर से सहयोग - रसोई" के बारे में बताया। उन्होंने हिसाब करते समय 10 किलो आलू का दाम कम जोड़ा तो मैंने पूछा भैया पैसा तो आप बहुत कम ले रहे हैं तो उन्होंने कहा कि मैंने जानबूझकर आलू का दाम नहीं जोड़ा है यह मेरी तरफ से इस वैश्विक संकट में अपने कार्यक्रम में सहयोग में ले लें, मुझ पर कृपा होगी। मेरे मना करने के बावजूद भी रामबचन जी नहीं माने। इस सामाजिक सरोकार मे सहयोग के लिए उन्हें हृदय की अनंत गहराइयों से आभार व धन्यवाद।
लाकँ डाउन के प्रथम चरण के अंतिम दिन दिनांक 14 अप्रैल को मेरा गांव मेरी जिम्मेदारी द्वारा विशेष भोजन की व्यवस्था की गई।इस वैश्विक संकट काल में "मेरा गांव, मेरी जिम्मेदारी" द्वारा चलाए जा रहे "घर से सहयोग- रसोई" के अंतर्गत आज (14 अप्रैल) भी 50 पैकेट रात्रि भोजन ( पूड़ी + मटर पनीर +चावल + खीर + अचार + सलाद ) थाना लाइन बाजार जौनपुर को *विशेष रुप से जौनपुर पुलिस के लिए दिया गया जो पिछले 21 दिनों से हम लोगों की सेवा में लगे है*। आज के भोजन के पैकेट पर घर के बच्चों द्वारा लिखा गया " SALUTE TO COVID-19 WARRIORS--- JAUNPUR POLICE".
प्रदीप मिश्र का कहना है कि मैं और मेरा परिवार सौभाग्यशाली है जिसके मन में ईश्वर ने यह प्रेरणा डाली कि आपको इस कठिन परिस्थिति में कुछ लोगों की जिम्मेदारी अपने कंधों पर लेना है। मेरा मानना है कि किसी भी सामाजिक कार्य का पुण्य तभी प्राप्त होता है ,जब उस कार्य को करते समय मन में अहम के स्थान पर सेवा का भाव बना रहे। यदि हर कॉलोनी हर मोहल्ले में हर परिवार अपने घर का भोजन बनाते समय 2 जरूरतमंद लोगों का अतिरिक्त भोजन बना ले तो किसी भी कॉलोनी में कोई भी जरूरतमंद भूखा नहीं सोएगा। वर्तमान संकट में जरूरी नहीं कि केवल गरीब लोगों को ही रोटी की आवश्यकता है बहुत से ऐसे रोज कमाने खाने वाले मध्यम वर्गीय परिवार आज जरूरतमंदों की श्रेणी में शामिल हैं जिनकी रोजी-रोटी लाकँ डाउन के कारण नहीं चल पा रही है।

