कृष्ण लीला का भाव भक्ति, प्रेम और दिव्य आनन्द है: प्रशान्त मिश्र

यजमान ज्ञान देवी के घर आयोजित कथा के 5वें दिन उमड़ी भारी भीड़

प्रयागराज। श्रीमद्भागवत कथा में कृष्ण लीला का भाव भक्ति, प्रेम और दिव्य आनन्द है जो जीवन के हर पहलू को एक चंचल और मधुर खेल के रूप में देखने को सिखाता है। यह लीलाएं आत्मा को भगवान के प्रति प्रेमपूर्ण भक्ति के मार्ग पर ले जाती हैं और भौतिक बुद्धि से परे एक गहरी, आंतरिक अनुभूति कराती हैं। उक्त बातें जनपद के बाघंबरी गद्दी आलापुर बीते 27 अक्टूबर से चल रही श्री मद्भागवत कथा के 5वें दिन श्री धाम वृन्दावन से प्रधारे ब्यास प्रशांत मिश्र महराज ने उपस्थित श्रोताओं के बीच कही।

मुख्य यजमान ज्ञान देवी पत्नी दयाशंकर तिवारी हैं जहां उपस्थित लोगों के बीच प्रशांत मिश्र ने श्रीकृष्ण जी महराज की बाल कथा पर प्रकाश डालते हुए कहा कि मईया यशोदा और ग्वालवाल के बीच की कथा अद्भुत ढंग से संगीतमय सुनाया। ब्यास गद्दी से कथा के माध्यम से समस्त सनातनियों को कथा भाव को अवगत करते हुए संदेश भी दिया कि श्रीकृष्ण का दिव्य प्रेम और भक्ति भाव है। उनकी लीलाएं भगवान और भक्तों के बीच गहरे प्रेम और भक्ति को दर्शाती हैं। ये प्रेम के अलौकिक और दिव्य स्वरूप को प्रकट करती हैं। कृष्ण की लीलाओं में एक चंचलता और मधुरता है जो जीवन के सबसे गहरे पहलुओं को भी हल्के-फुल्के ढंग से समझने में मदद करती है। यह सिखाता है कि जीवन में गंभीरता के साथ आनंद और खेल-कूद भी आवश्यक है।

उन्होंने आगे बताया कि भक्ति का सहज मार्ग है कृष्ण लीलाएं भक्तों को भक्ति का मार्ग सिखाती हैं। इन लीलाओं के माध्यम से आत्माएं भगवान के साथ एक गहरा संबंध स्थापित कर पाती हैं। आंतरिक आनंद कृष्ण लीलाएं बाहरी क्रियाओं या भौतिक बुद्धि से परे जाकर आंतरिक आनंद और संतुष्टि प्राप्त कराती हैं।कथा को सुनकर श्रोतागण भक्ति भाव के सागर में झूम रहे थे। इस कथा के आयोजक जय प्रकाश तिवारी, दिवाकर तिवारी अधिवक्ता उच्च न्यायालय, सुधाकर जी, प्रभाकर जी, अरुण तिवारी आदि प्रमुख रहे।

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