जमीनी विवाद में 12 लोगो पर गम्भीर धाराओं में मुकदमा दर्ज
मुकदमा दर्ज कर कार्यवाही का आदेश-सीजेएम जौनपुर
सीजेएम जौनपुर के आदेश पर मुकदमा दर्ज
जौनपुर कोर्ट का आदेश: आबादी की जमीन पर अवैध कब्जे और जानलेवा हमले के मामले में दर्ज होगा परिवाद
जौनपुर। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (CJM) कोर्ट नंबर 11, जौनपुर ने ग्राम सुरहुरपुर (थाना जलालपुर) में हुए विवाद और पुलिस की निष्क्रियता पर कड़ा रुख अपनाते हुए महत्वपूर्ण आदेश जारी किया है। न्यायालय ने प्रार्थी सुरेन्द्र कुमार द्वारा विपक्षी प्रेमशंकर व अन्य के विरुद्ध दी गई अर्जी को परिवाद (Complaint) के रूप में दर्ज करने का निर्देश दिया है।
मामला 14 जून 2025 की शाम का है, जब विपक्षी प्रेमशंकर, रामआसरे, अरुण, और उनके परिवार के लगभग एक दर्जन सदस्यों ने एकजुट होकर प्रार्थी सुरेन्द्र कुमार की 'आबादी' की जमीन पर जबरन टिनशेड रखकर कब्जा करने का प्रयास किया। विरोध करने पर विपक्षीगणों ने प्रार्थी और उनके बेटों (संतोष व आकाश) पर लाठी-डंडों से जानलेवा हमला कर दिया। हमले में संतोष के सिर पर गंभीर चोट आने के कारण वह मौके पर ही बेहोश हो गया था और उसे जिला चिकित्सालय जौनपुर रेफर करना पड़ा था।प्रार्थी का आरोप है कि घटना की सूचना 112 नंबर और थाना जलालपुर को समय पर दी गई थी, लेकिन पुलिस ने दोषियों पर कार्यवाही करने के बजाय टालमटोल की। आरोप यह भी है कि विपक्षीगणों के प्रभाव में आकर पुलिस ने पीड़ित पक्ष के विरुद्ध ही 'क्रॉस केस' दर्ज कर लिया, जबकि पीड़ितों का उपचार सरकारी अस्पताल में चल रहा था।मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट श्वेता यादव ने पत्रावली का अवलोकन करने के बाद पाया कि मामले में साक्ष्य और जांच की प्रक्रिया आवश्यक है। माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा 'प्रियंका श्रीवास्तव बनाम उत्तर प्रदेश राज्य' मामले में दिए गए विधिक सिद्धांतों का हवाला देते हुए न्यायालय ने आदेश दिया कि:
• धारा 173(4) BNSS के प्रार्थना पत्र को परिवाद के रूप में दर्ज किया जाए।
• मामले को संबंधित क्षेत्राधिकार वाले न्यायालय में स्थानांतरित किया जाए।
• अगली सुनवाई और बयान दर्ज करने हेतु 21 फरवरी 2026 की तिथि निर्धारित की गई है।
इस आदेश के बाद अब विपक्षीगणों को न्यायालय के समक्ष पेश होकर अपना पक्ष रखना होगा और पुलिस की भूमिका पर भी सवालिया निशान खड़े हो गए हैं।

