स्थानीय कलाकारों पर मेहरबान ‘जौनपुर महोत्सव’, सियासत या सुधार?
पिछले महोत्सवों में उपेक्षा झेल चुके जिले के कलाकारों को इस बार मंच मिलने से माहौल गर्म है। जहां कलाकारों में खुशी की लहर है, वहीं शहर में यह चर्चा भी जोरों पर है कि यह “चुनावी दांव” है या फिर “पिछली नाराजगी की भरपाई”।
ऐतिहासिक शाही किला में मंगलवार से तीन दिवसीय जौनपुर महोत्सव का आगाज होगा। 24 से 26 मार्च तक चलने वाले इस महोत्सव की सबसे बड़ी खासियत इस बार स्थानीय कलाकारों को दी गई प्राथमिकता है। जिले के नामी-गिरामी कलाकार अपनी प्रस्तुतियों से मंच सजाएंगे।
पिछले वर्षों के महोत्सवों में सीमित अवसर मिलने से नाराज स्थानीय कलाकारों की आवाज इस बार रंग लाई है। तब करीब 90 फीसदी कलाकारों ने उपेक्षा का आरोप लगाते हुए नाराजगी जताई थी। इस बार प्रशासन के रुख में बदलाव को लेकर शहर में तरह-तरह की चर्चाएं हैं—कोई इसे चुनावी रणनीति बता रहा है तो कोई इसे पिछली नाराजगी दूर करने की कोशिश मान रहा है।
जिलाधिकारी डॉ. दिनेश चन्द्र ने स्पष्ट किया कि महोत्सव के आयोजन के लिए किसी से चंदा नहीं लिया गया है। कार्यक्रम प्रशासन अपने संसाधनों से कराया जा रहा है।
कलेक्ट्रेट सभागार में आयोजित प्रेसवार्ता में राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) खेल एवं युवा कल्याण विभाग गिरीश चंद्र यादव ने बताया कि 24 मार्च को मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह कार्यक्रम आयोजित होगा। 25 व 26 मार्च को सांस्कृतिक कार्यक्रमों की श्रृंखला चलेगी।
महोत्सव में कवि सम्मेलन, सांस्कृतिक संध्या, शिव तांडव, मां काली नाटक, राम दरबार (अयोध्या) विग्रह दर्शन, पाई डंडा नृत्य व राजस्थान के कलाकारों द्वारा भगवान विष्णु के दशावतार की प्रस्तुति जैसे कार्यक्रम आकर्षण का केंद्र रहेंगे। इसके साथ ही प्रदर्शनी भी लगाई जाएगी।
सामूहिक विवाह कार्यक्रम में प्रदेश के प्रभारी मंत्री ए.के. शर्मा शामिल होंगे। पात्र जोड़ों का बायोमेट्रिक सत्यापन कर विवाह संपन्न कराया जाएगा।
आयोजन को लेकर प्रशासन ने व्यापक तैयारियां की हैं। कानून-व्यवस्था, स्वास्थ्य, भोजन, बिजली व मंच व्यवस्था के लिए अलग-अलग अधिकारियों को जिम्मेदारी सौंपी गई है।
मंत्री ने मीडिया से अपील की है कि महोत्सव का व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाए, ताकि अधिक से अधिक लोग इसमें शामिल होकर योजनाओं का लाभ उठा सकें।

