गोविंद बल्लभ पंत पीजी कॉलेज के प्रबंधन विवाद पर विश्वविद्यालय ने मामला शासन को भेजा
जानकारी के अनुसार इससे पूर्व भी महाविद्यालय में वर्ष 1977 में शासन स्तर से धारा 57 एवं 58 के अंतर्गत कार्यवाही की गई थी, जिसके विरुद्ध दायर याचिका पर इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने उक्त कार्यवाही पर रोक लगाते हुए संस्थापक मंडल को महाविद्यालय का प्रबंध तंत्र संचालित करने का अधिकार दिया था। उच्च न्यायालय के आदेश के अनुसार संस्थापक मंडल ने वर्ष 1977 से 2010 तक महाविद्यालय के प्रबंधन का कार्य किया।
प्राप्त जानकारी के अनुसार महाविद्यालय को संचालित करने वाली संस्था की नियमावली के अंतर्गत संस्थापक मंडल ने प्रबंध समिति के कार्यकाल के दौरान कथित वित्तीय अनियमितताओं तथा कर्मचारियों से संबंधित शिकायतों को गंभीर मानते हुए प्रबंध समिति (Committee of Management) को भंग करने का निर्णय लिया था।
संस्थापक मंडल द्वारा प्रबंध समिति को भंग करने के उपरांत इस कार्रवाई की सूचना एवं अनुमोदन के लिए प्रस्ताव वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय को भेजा गया था। इसके बाद विश्वविद्यालय को दोनों पक्षों से विभिन्न प्रार्थना पत्र एवं आपत्तियाँ प्राप्त हुईं, जिनके आधार पर विश्वविद्यालय स्तर पर पूरे प्रकरण की समीक्षा की गई।
सूत्रों के अनुसार वर्ष 2010 में संस्थापक मंडल ने विश्वविद्यालय की अनुमति से क़िसान एजुकेशन ट्रस्ट के सदस्यों के माध्यम से प्रबंध समिति का चुनाव कराकर प्रबंधन का कार्यभार सौंपा था। इसके बाद वर्ष 2011 से 2024 तक संस्थापक मंडल के सदस्यों के नवीनीकरण का मामला लंबित रहा, जिसे अक्टूबर 2024 में सहायक निबंधक, फर्म्स सोसाइटी एवं चिट्स द्वारा विस्तृत आदेश जारी कर नवीनीकरण किया गया।
विश्वविद्यालय द्वारा जारी आदेश में कहा गया है कि महाविद्यालय के प्रबंधन को लेकर संस्थापक मंडल एवं प्रबंध समिति के बीच विवाद की स्थिति उत्पन्न हो गई है, जो मुख्यतः प्रबंध समिति के गठन एवं अधिकारों से संबंधित है। ऐसे मामलों पर अंतिम निर्णय लेना विश्वविद्यालय के अधिकार क्षेत्र में नहीं होने के कारण प्रकरण को शासन को संदर्भित किया गया है।
विश्वविद्यालय के इस आदेश के बाद अब इस प्रकरण में आगे की कार्रवाई उत्तर प्रदेश शासन के स्तर पर होने की संभावना है, जिससे महाविद्यालय के प्रशासनिक एवं शैक्षणिक कार्यों के सुचारु संचालन का मार्ग प्रशस्त हो सके।

