अलम नौचन्दी जुलूस—ए—अमारी में उमड़ा जनसैलाब
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शिया स्कॉलर मौलाना कल्बे रुशैद दिल्ली ने मजलिस को किया खेताब
जौनपुर। शहर के बाजार भुआ स्थित मीर बहादुर अली दालान इमामबारगाह पर 86 साल पहले उठे अलम नौचंदी और जुलूस अमारी का आयोजन हुआ। जुलूस में शिया समुदाय का भारी जनसैलाब उमड़ा। इसके अलावा दूसरे धर्म के लोगों ने भी बढ़—चढ़कर इसमें हिस्सा लिया। जुलूस की मजलिस को शिया स्कॉलर धर्म गुरु विश्व ख्याति प्राप्त मौलाना कल्बे रुशैद रिजवी दिल्ली ने खेताब किया। भारी तादाद में मजलिस में भी लोगों की भीड़ रही।कमेटी के अध्यक्ष सैयद अलमदार हुसैन रिजवी ने बताया कि जुलूस 86 साल पहले अलम की शक्ल में तब उठा था जब पूरे शहर में प्लेग की बीमारी फैली हुई थी। इस बीमारी खतरे को कम करने के लिए प्रभावित इलाकों में अलम को गुजारा गया जिससे लोगों को इस बीमारी से निजात मिल गई तभी से ये जुलूस लगातार उठता आ रहा है। आज भी इस अलम पर लोगों की मन्नतें पूरी होती हैं। बड़ी संख्या में इस वजह से भी लोग यहां आते हैं।
मजलिस में जब मौलाना ने हजरत अब्बास का मसाएब पढ़ा तो वहां मौजूद हर किसी की आंखें नम हो गईं। लोग सीने और सिर पर हाथ मारकर रोने लगे। क्या बड़े, बच्चे, महिलाएं, सभी रो रहे थे। इसी के साथ अलम और दुलदुल की शबीह इमामबारगाह से बरामद हुई। इसके पहले सोजखानी गौहर अली जैदी और एडवोकेट एहतेशाम अब्बास सहित उनके साथियों ने की। कई शायरों ने शेर भी पढ़े।
मगरिब की नमाज को मौलाना सफदर हुसैन जैदी ने खेताब किया जिसके बाद शिया इण्टर कॉलेज के रिटायर प्रिंसिपल मोहम्मद हसन ने पहली तकरीर किया जिसके बाद जुलूस में अमारियां और झूला अली असगर शामिल हुआ। अंजुमन अजादारिया बारादुआरिया के हमराह शहर की सभी 20 से ज्यादा अंजुमनों ने जुलूस ने नौहा—मातम किया। जुलूस जब मीरघर पहुंचा तो डॉ. कमर अब्बास ने तकरीर की जिसके बाद अलम और ताबूते सकीना का मिलन कराया गया। ये जुलूस पांचों शिवाला मंदिर रोड, मोहाल गाजी, नसीर खां, छतरी घाट होता हुआ सदर इमामबारगाह पहुंचा जहां आखिरी तकरीर बेलाल हसनैन ने की। इसके बाद जुलूस में अलविदाई मामत हुआ जिसके बाद जुलूस खत्म हो गया।
इस अवसर पर दिलदार हुसैन रिजवी, सरदार हुसैन रिजवी, आलम अब्बास, सरताज अब्बास, सैफ अब्बास, शहनवाज अब्बास आदि मौजूद रहे। अन्त में कमेटी के सेक्रेटरी शहंशाह हुसैन रिजवी ने सभी के प्रति आभार जताा।

