जौनपुर के लाल ने रचा इतिहास: जानिए अधिवक्ता के बेटे प्रो. राजीव श्रीवास्तव का जौनपुर से लेकर IIIT रांची के निदेशक तक सफर की रोचक कहानी , 'फेस ऑफ इंडिया-2026' सम्मान से भी हुए सम्मानित
जौनपुर की धरती से निकलकर IIT (BHU) के HAG प्रोफेसर और अब IIIT रांची के निदेशक तक का सफर, युवाओं के लिए बने प्रेरणा के प्रतीक
जौनपुर। कहते हैं कि अगर सपने बड़े हों, लक्ष्य स्पष्ट हो और मेहनत ईमानदारी से की जाए, तो छोटे शहरों से निकले युवा भी देश की सबसे ऊंची बुलंदियों को छू सकते हैं। उत्तर प्रदेश के जौनपुर जनपद ने एक बार फिर इसे सच साबित किया है। नगर के हुसेनाबाद निवासी, वरिष्ठ अधिवक्ता स्व सुरेन्द्र नाथ के पुत्र प्रो. राजीव श्रीवास्तव ने अपनी प्रतिभा, कठिन परिश्रम और लगन के दम पर देश की उच्च शिक्षा और तकनीकी जगत में ऐसा मुकाम हासिल किया है, जो आज हजारों विद्यार्थियों के लिए प्रेरणा बन गया है।
शिक्षा, अनुसंधान और प्रशासनिक नेतृत्व के क्षेत्र में उनके उत्कृष्ट योगदान के लिए उन्हें प्रतिष्ठित 'फेस ऑफ इंडिया-2026' सम्मान से सम्मानित किया गया है। वहीं वर्तमान समय में उन्हें IIIT रांची का निदेशक बनाए जाने से जौनपुर का नाम राष्ट्रीय स्तर पर और भी गौरवान्वित हुआ है। उनकी इस उपलब्धि पर पूरे जिले में खुशी का माहौल है तथा शिक्षकों, विद्यार्थियों, अधिवक्ताओं और शुभचिंतकों ने उन्हें बधाई दी है।
प्रो. राजीव श्रीवास्तव की प्रारंभिक शिक्षा जौनपुर में ही हुई। बचपन से ही मेधावी रहे राजीव ने हाईस्कूल और इंटरमीडिएट की परीक्षाओं में शानदार प्रदर्शन किया। इंटरमीडिएट में कॉलेज टॉपर बनने के बाद उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा। उन्होंने मदन मोहन मालवीय इंजीनियरिंग कॉलेज, गोरखपुर से बी.ई., दिल्ली कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग से एम.ई. तथा दिल्ली विश्वविद्यालय के फैकल्टी ऑफ टेक्नोलॉजी से कंप्यूटर इंजीनियरिंग में पीएचडी की उपाधि प्राप्त की।
उनके शैक्षणिक जीवन की शुरुआत एमएनएनआईटी प्रयागराज से हुई। इसके बाद उन्होंने जीबी पंत इंजीनियरिंग कॉलेज, पौड़ी और एनएसआईटी नई दिल्ली में अपनी सेवाएं दीं। वर्ष 2007 में वे IIT (BHU), वाराणसी से जुड़े, जहां उन्होंने कंप्यूटर साइंस एवं इंजीनियरिंग विभाग में प्रोफेसर, विभागाध्यक्ष (HoD), डीन तथा HAG प्रोफेसर जैसे महत्वपूर्ण पदों पर अपनी जिम्मेदारियां निभाईं। उनकी उत्कृष्ट प्रशासनिक क्षमता और शैक्षणिक नेतृत्व को देखते हुए अब उन्हें IIIT रांची का निदेशक नियुक्त किया गया है।
शोध और नवाचार के क्षेत्र में भी प्रो. श्रीवास्तव की उपलब्धियां बेहद प्रेरणादायक हैं। उनके नाम 210 से अधिक शोध पत्र, 5 पुस्तकें, 22 पुस्तक अध्याय, 40 से अधिक अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन शोधपत्र और 37 से अधिक पेटेंट दर्ज हैं। उन्होंने DRDO सहित भारत सरकार की कई महत्वपूर्ण परियोजनाओं का सफल नेतृत्व किया है। उनके निर्देशन में 19 शोधार्थी पीएचडी पूरी कर चुके हैं, जबकि कई अन्य शोध कार्य कर रहे हैं।
वे IEEE (USA) के सीनियर मेंबर, FIE और FIETE के फेलो हैं। साथ ही NBA, UGC, DRDO, IITs, NITs और IIITs जैसी प्रतिष्ठित संस्थाओं की विशेषज्ञ समितियों में भी अपनी सेवाएं दे चुके हैं। डेटा माइनिंग, बिग डेटा, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), मशीन लर्निंग, डीप लर्निंग और कंप्यूटेशनल बायोइन्फॉर्मेटिक्स जैसे आधुनिक विषयों में उनका शोध देश और दुनिया में सराहा जाता है।
जौनपुर के छात्रों के लिए बड़ा संदेश
प्रो. राजीव श्रीवास्तव की सफलता यह संदेश देती है कि सफलता केवल बड़े शहरों की मोहताज नहीं होती। यदि लक्ष्य स्पष्ट हो, मेहनत निरंतर हो और सीखने की ललक बनी रहे, तो जौनपुर जैसे शहर का एक सामान्य परिवार का बेटा भी देश के प्रतिष्ठित तकनीकी संस्थानों का नेतृत्व कर सकता है।
आज जब अधिकांश युवा प्रतियोगी परीक्षाओं और करियर को लेकर असमंजस में रहते हैं, ऐसे समय में प्रो. राजीव श्रीवास्तव का संघर्ष और उपलब्धियां उन्हें यह विश्वास दिलाती हैं कि परिश्रम, अनुशासन और शिक्षा ही सफलता की सबसे मजबूत सीढ़ी हैं।
जौनपुर के इस गौरव ने न केवल अपने परिवार और जिले का नाम रोशन किया है, बल्कि पूरे प्रदेश के युवाओं के सामने एक ऐसा आदर्श प्रस्तुत किया है, जो आने वाली पीढ़ियों को बड़े सपने देखने और उन्हें साकार करने का साहस देता रहेगा।

