स्ट्रीट लाइट के फाउंडेशन को तोड़ने पर ठेकेदार के नाम दर्ज कर दी रिपोर्ट, जांच पर उठे सवाल
मड़ियाहूं के काजीकोट वार्ड का मामला, शिकायतकर्ता ने चार लोगों पर लगाया तोड़फोड़ का आरोप; वीडियो, फोटो व सीसीटीवी फुटेज होने का किया दावा
मड़ियाहूं (जौनपुर)। नगर पंचायत मड़ियाहूं के वार्ड काजीकोट में स्ट्रीट लाइट लगाने के लिए बनाए गए फाउंडेशन को तोड़े जाने के मामले में नगर पंचायत की जांच रिपोर्ट सवालों के घेरे में आ गई है। शिकायतकर्ता का आरोप है कि जांच अधिकारी ने वास्तविक तथ्यों की पड़ताल किए बिना फाउंडेशन तोड़ने की जिम्मेदारी ठेकेदार पर डालते हुए मामले का निस्तारण कर दिया। वहीं शिकायतकर्ता ने मौके की घटना के वीडियो, फोटो और सीसीटीवी फुटेज उपलब्ध होने का दावा करते हुए उच्चस्तरीय जांच की मांग की है।
मामला शिकायत संख्या 4001942607428 से जुड़ा है। शिकायतकर्ता हिमांशु विश्वकर्मा के मुताबिक नगर पंचायत के लिपिक एवं जांच अधिकारी अमरनाथ विश्वकर्मा की ओर से तैयार रिपोर्ट में बताया गया कि स्ट्रीट लाइट लगाने के लिए ठेकेदार ने फाउंडेशन बनाया था। इससे रास्ते से वाहनों के आवागमन में परेशानी होने की शिकायत मिलने पर ठेकेदार ने स्वयं फाउंडेशन तोड़ दिया।
रिपोर्ट को बताया तथ्यहीन
शिकायतकर्ता ने जांच रिपोर्ट पर आपत्ति जताते हुए इसे तथ्यहीन बताया है। उसका कहना है कि फाउंडेशन ठेकेदार ने नहीं तोड़ा, बल्कि चार स्थानीय लोगों पर तोड़फोड़ में शामिल होने का आरोप लगाया गया है। इनमें एजाज कुरैशी, डा. रोहित विश्वकर्मा, शैलेश विश्वकर्मा और अजय मौर्या के नाम शिकायतकर्ता ने बताए हैं। हालांकि आरोपित पक्ष का पक्ष इस संबंध में सामने नहीं आया है।
शिकायतकर्ता का दावा है कि घटना से संबंधित वीडियो, फोटो और सीसीटीवी फुटेज उसके पास मौजूद हैं। इन साक्ष्यों की जांच होने पर फाउंडेशन तोड़े जाने की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकती है।
वाहन आवागमन में बाधा पर भी सवाल
शिकायतकर्ता का कहना है कि जिस स्थान पर फाउंडेशन बनाया गया था, वहां से वाहनों के आवागमन में कोई ऐसी बाधा नहीं थी, जिसके कारण उसे तोड़ने की जरूरत पड़े। ऐसे में जांच रिपोर्ट में वाहन आवागमन में परेशानी को आधार बनाए जाने पर भी सवाल उठाए जा रहे हैं।
उच्चस्तरीय जांच की मांग
शिकायतकर्ता और स्थानीय लोगों ने जिला प्रशासन से मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। उन्होंने कहा कि मौके की स्थिति का सत्यापन करने के साथ वीडियो, फोटो और सीसीटीवी फुटेज की भी जांच कराई जाए। यदि सरकारी संपत्ति को जानबूझकर नुकसान पहुंचाने की पुष्टि होती है तो संबंधित लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाए। वहीं जांच में लापरवाही या तथ्यों की अनदेखी सामने आने पर जिम्मेदार अधिकारियों-कर्मचारियों की भूमिका भी तय की जाए।
अब देखना यह है कि शिकायतकर्ता की ओर से बताए जा रहे साक्ष्यों की जांच होती है या मामला नगर पंचायत की रिपोर्ट तक ही सीमित रह जाता है।

